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मार्ग में हिमालय अड़ने, डरावनी लहरों के थपेड़े मारने, नाविकों के सो जाने से क्या अभिप्राय है?

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रानी लक्ष्मीबाई को अपनी प्यारी झाँसी शत्रुओं के हाथ में चले जाने का दुःख है। स्वराज्य की मंजिल हर बार पास आकर दूर चली जाती है। रानी स्वराज्य को पास आते हुए देखती हैं, पर तभी हिमालय जैसी बाधाएँ उनके मार्ग में आ जाती हैं। जब वे इन बाधाओं को पार करती हैं, तो मुसीबतों के महासागर सामने उमड जाते है। जब वे उन्हें पार करना चाहती हैं, तो देखती हैं कि नाविक सो रहे हैं। ये नाविक है विलास में डूबे हुए उनके साथी सेनापति तात्या, राव साहब, बाँदा के नवाब आदि।



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