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‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य की कथावस्तु (कथानक या सारांश) संक्षेप में लिखिए।या‘मातृभूमि के लिए खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद के जीवन की प्रमुख घटनाओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद का जीवन-चरित्र संक्षेप में लिखिए।या‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर चन्द्रशेखर आजाद की राष्ट्रनिष्ठा का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।[ संकेत-इस प्रश्न के उत्तर हेतु आजाद के ‘विद्यार्थी जीवन’ की एवं ‘अल्फ्रेड पार्क’ के प्रसंग को संक्षेप में लिखें।

Answer»

तृतीय सर्ग में ‘आजाद के जीवन के अन्तिम समय की क्रियाशीलता और बाधाओं का वर्णन किया गया है। ‘आजाद जब बहुत थक जाते थे, तब वे प्रकृति के बीच जाकर विश्राम करते थे। मध्य प्रदेश की सातार नदी के तट पर हनुमान जी का मन्दिर और पर्वत की  गुफा उनका ऐसा ही विश्राम-स्थल था। वे फाल्गुन के सुहावने दिनों में ऊषाकाल के समय संघर्ष से थककर अपने मित्र रुद्र के साथ बैठकर भावी संघर्ष की योजना बना रहे थे। मित्रों की याद करके बदला लेने के लिए बार-बार उनका चेहरा तमतमा उठता था। उन्होंने अपने मित्र से कहा कि “अंग्रेजों ने भारतमाता के पुत्रों के खून से उसका आँचल रँग दिया है। इस कृत्य के लिए मैं अंग्रेजों को छोड़ नहीं सकता। आर्मी के संगठन को मजबूत करके क्रान्ति का बिगुल बजाते हुए मुझे अपना दायित्व पूरा करना ही होगा।

एक दिन आजाद फूलबाग की सभा में सशस्त्र क्रान्ति के विरुद्ध एक नेता का भाषण सुन रहे थे। वहीं पर खड़े गणेश शंकर विद्यार्थी ने उनके उत्तेजित मन को शान्त किया और कहा-“देख आजाद! नेता की अनजानी बातों को मत सुननी। उन्हें इस बात का भय था कि आजाद कहीं इस सभा को भंग ने कर दें। उनका यह विचार भ्रम-मात्रे ही था; क्योंकि आजाद स्वतन्त्रता की लड़ाई के लिए शासन से अपने आपको सुरक्षित रखना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वे प्रयाग जाकर जवाहरलाल नेहरू, पुरुषोत्तम दास आदि मित्रों से मिलकर भावी योजना बनाना चाहते थे और उसके बाद उनका अहमदाबाद जाने का विचार था।

फरवरी, सन् 1931 ई० को प्रयाग के अल्फ्रेड पार्क में बैठकर वे कुछ मित्रों से बातें कर रहे थे। उसी समय वहाँ पुलिस की गाड़ी आकर रुकी और पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया। आजाद ने क्षणभर में अपने मित्रों को विदा करके अपनी पिस्तौल में गोलियाँ भरीं और पुलिस से मोर्चा लिया। पहली ही गोली मैं उन्होंने एक अफसर का जबड़ा उड़ा दिया। नॉट बाबर नाम के एक अंग्रेज एस०पी० ने वृक्ष की ओट से गोलियाँ दागनी शुरू कर दीं। ‘आजाद’ अकेले ही उससे मोर्चा ले रहे थे। उन्होंने एक घण्टे तक डटकर विशाल पुलिस दल का मुकाबला किया और एक गोली से एस०पी० की कलाई उड़ा दी। वह निरन्तर पुलिस पर गोलियाँ बरसाते रहे, परन्तु जब उस एकाकी वीर के पास अकेली गोली बची, तो उसे उसने अपनी कनपटी पर मारकर वीरगति प्राप्त कर ली। नॉट बाबर को उनके मरने पर सन्देह था,  इसलिए उसने आजाद के तलुवे में गोली मारकर अपना सन्देह दूर किया। आजाद के विस्मयकारी बलिदान से सारा देश स्तब्ध रह गया।

आजाद ने जिस जामुन के पेड़ की ओट लेकर संघर्ष किया था, वह पेड़ भारतीय जनता का पूजास्थल बन गया। अंग्रेज सरकार ने आतंकित होकर उसको भी समूल कटवा दिया।



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