1.

“मैके के सामने हम लोगों को कुछ समझती ही नहीं।” 

Answer»

प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है जिसके कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द जी हैं।
संदर्भ : प्रस्तुत वाक्य लालबिहारी सिंह ने श्रीकंठ सिंह से कहा।
स्पष्टीकरण : श्रीकंठ सिंह शनिवार को जब घर आए तो लालबिहारी ने अपनी भाभी की शिकायत करते हुए कहा कि भैया आप भाभी को जरा समझा देना कि मुँह संभाल कर बातचीत किया करें। जब श्रीकंठ सिंह ने पूछा आखिर बात क्या हुई है, तब लालबिहारी कहता है- आप ही आप उलझ पड़ीं। मैके के सामने हम लोगों को कुछ समझती ही नहीं। वह बड़े घर की बेटी है तो हम भी कोई कुर्मी कहार नहीं हैं।



Discussion

No Comment Found