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“मैके के सामने हम लोगों को कुछ समझती ही नहीं।” |
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Answer» प्रसंग : प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक ‘साहित्य वैभव’ की कहानी ‘बड़े घर की बेटी’ से लिया गया है जिसके कहानीकार मुंशी प्रेमचन्द जी हैं। |
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