1.

मैं चतूर था, इतना चतुर जितना मनुष्य को न होना चाहिए, क्योंकि मुझे विश्वास हो गया है कि मनुष्य अधिक चतुर बनकर अपने को अभागा बना लेताहै और भगवान् की दया से वंचित हो जाता है।आशय स्पष्ट कीजिये​

Answer»

very INTELLIGENT PERSON I LIKE it



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions