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मैं चुपचाप सुनता जा रहा था। गुरुदेव ने बातचीत के सिलसिले में एक बार कहा, “अच्छा साहब, आश्रम के कौए क्या हो गए ? उनकी आवाज़ सुनाई ही नहीं देती ?” न तो मेरे साथी उन अध्यापक महाशय को यह खबर थी और न मुझे ही।बाद में मैंने लक्ष्य किया कि सचमुच कई दिनों से आश्रम में कौए नहीं दिख रहे हैं। मैंने तब तक कौओं को सर्वव्यापक पक्षी ही समझ रखा था। अचानक उस दिन मालूम हुआ कि ये भले आदमी भी कभी-कभी प्रवास को चले जाते हैं या चले जाने को बाध्य होते हैं। एक लेखक ने कौओं की आधुनिक साहित्यिकों से उपमा दी है, क्योंकि इनका मोटो है ‘मिसचिफ फार मिसचिफ सेक’ (शरारत के लिए ही शरारत)। तो क्या कौओं का प्रवास भी किसी शरारत के उद्देश्य से ही था ? प्रायः एक सप्ताह के बाद बहुत कौए दिखाई दिए।1. अध्यापक महाशय और लेखक को किस बात की खबर न थी ?2. कौए के विषय में लेखक की क्या धारणा थी ? उसकी धारणा में क्या कोई बदलाव आया ?3. ‘आधुनिक’ तथा ‘उद्देश्य’ शब्द का विलोम शब्द लिखिए। |
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Answer» 1. अध्यापक महाशय और लेखक को इस बात की खबर ही न थी कि आश्रम में कौए नहीं हैं। जब गुरुदेव ने पूछा कि आश्चम के कौए क्या हो गये तब उनका ध्यान इस ओर गया। 2. कौए के विषय में लेखक की यह धारणा थी कि कौआ सर्वव्यापी पक्षी है। उसकी धारणा में बदलाय यह आया कि ये भी कभी-कभी प्रयास पर चले जाते हैं, या जाने के लिए बाध्य होते हैं। 3. आधुनिक × प्राचीन |
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