1.

मैं जब यह कविता पढ़ता हूँ तब मेरे सामने श्रीनिकेतन के तितल्ले पर की वह घटना प्रत्यक्ष-सी हो जाती है। वह आँख मूंदकर अपरिसीम आनंद, वह ‘मूक हृदय का प्राणपण आत्मनिवेदन’ मूर्तिमान हो जाता है। उस दिन मेरे लिए वह एक छोटी-सी घटना थी, आज वह विश्व की अनेक महिमाशाली घटनाओं की श्रेणी में बैठ गई है।एक आश्चर्य की बात और इस प्रसंग में उल्लेख की जा सकती है। जब गुरुदेव का चिताभस्म कलकत्ते (कोलकाता) से आश्रम में लाया गया, उस समय भी न जाने किस सहज बोथ के बल पर वह कुत्ता आश्रम के द्वार तक आया और चिताभस्म के साथ अन्यान्य आश्रमवासियों के साथ शांत गंभीर भाव से उत्तरायण तक गया। आचार्य क्षितिमोहन सेन सबके आगे थे। उन्होंने मुड़ो बताया कि वह चिताभस्म के कत्नश के पास थोड़ी देर चुपचाप बैठा भी रहा।1. कविता पढ़ने पर लेखक के सामने कौन-सी घटना प्रत्यक्ष हो उठती है ?2. गुरुदेव का चिताभस्म आने पर कुत्ते ने क्या किया ?3. गुरुदेव का चिताभस्म आने पर कुत्ते ने क्या किया ?

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1. गुरुदेव ने अपने कुत्ते की भक्ति पर एक कविता लिखी है। लेखक जब उसे पढ़ते हैं तो उन्हें उस से संबंधित घटना उनकी आँखों के समक्ष साकार हो उठती है। किस तरह कुत्ता उनको खोजते हुए शांतिनिकेतन से श्रीनिकेतन आ पहुँचता है और गुरुदेव के हाथ का स्पर्श पाते ही उसका रोम-रोम आनंदित हो उठता है।

2. गुरुदेव का चिताभस्म जब आश्रम में लाया गया तब न जाने वह कुत्ता कहाँ से आ गया और सहज बोध के बल पर वह कुत्ता आश्रम के द्वार तक आया और चिताभस्म के साथ अन्यान्य आश्रमवासियों के साथ शांत गंभीर भाव से उत्तरायण तक गया। वह गुरुदेव के चिताभस्म – कलश के पास भी थोड़ी देर बैठा रहा।

3. आत्मनिवेदन का सामासिक विग्रह है – आत्मा का निवेदन
चिताभस्म का सामासिक विग्रह है – चिता का भस्म।



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