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‘मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ-कथन से कवि का क्या आशय है? अथवा कवि जग का ध्यान क्यों नहीं करता?

Answer»

संसार स्वार्थी है। कवि त्याग और निस्वार्थ प्रेम के आदर्श में विश्वास करता है। संसार का आचरण उससे भिन्न है। अत: कवि जग का ध्यान नहीं करता।



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