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मैना की अंतिम इच्छा थी कि उस प्रासाद के ढेर पर बैठकर जी भर रो ले लेकिन पाषाण हृदयवाले जनरल ने किस भाव से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी ?

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पाषाण-हृदयी जनरल अंग्रेज सरकार का नौकर था । वह अंग्रेजों के प्रति अपनी वफादारी साबित करना चाहता था । यदि मैना को छोड़ दिया जाय तो अन्य लोग पुनः विद्रोह कर सकते थे । पुनः दूसरा कोई ऐसा दुष्कृत्य न कर सके । मैना रात्रि के समय विलाप करती तो उसकी आवाज दूर-दूर तक जाती और संभवतः बहुत से लोग वहाँ एकत्रित होते और नाना साहब के आन्दोलन को और भी वेग मिलता । इन सभी संभावनाओं से डरकर पाषाण हृदयवाले जनरल ने नाना के प्रति घृणा भाव से उसकी इच्छा पूर्ण न होने दी ।



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