1.

मैने सदा किया है सबसे, मधुर प्रेम का ही व्यवहार। विनिमय में पाया सदैव ही, कोमल अन्स्ततल का प्यार।।

Answer»

कवयित्री कहती है- मैंने सदा प्रेम दिया है और बदले में मुझे प्रेम ही मिला है। मधुरता, कोमलता तथा प्रेम की भावना लिए हुए हूँ। सारे संसार को ही मैंने प्रेममयी बना लिया है। कवयित्री न कभी रोती है और न वह किसी को रोते देखना चाहती है। इस प्रकार कवयित्री सकारात्मक सोच को महत्व देती है।



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions