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मौलिक अधिकारों का अर्थ और परिभाषा लिखिए।

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वे अधिकार, जो मानव-जीवन के लिए मौलिक तथा अपरिहार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किए जाते हैं, ‘मौलिक अधिकार’ कहलाते हैं। व्यवस्थापिका तथा कार्यपालिका द्वारा इनका उल्लंघन नहीं किया जा सकता है। देश की न्यायपालिका एक प्रहरी की भाँति इन अधिकारों की सुरक्षा करती है। राज्य का मुख्य उद्देश्य नागरिकों का चहुंमुखी विकास व उनका कल्याण करना है। इसलिए संविधान द्वारा नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए जाते हैं। भारतीय संविधान द्वारा भी इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किए गए हैं। जी० एन० जोशी का कथन है, “मौलिक अधिकार ही ऐसा साधन है, जिसके द्वारा एक स्वतन्त्र लोकराज्य के नागरिक अपने सामाजिक, धार्मिक तथा नागरिक जीवन का आनन्द उठा सकते हैं। इनके बिना लोकतन्त्रीय शासन सफलतापूर्वक नहीं चल सकता और बहुमत की ओर से अत्याचारों का खतरा बना रहता है।”



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