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मध्यकाल की प्रादेशिक भाषाओं की संक्षिप्त में जानकारी दीजिए ।

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प्रादेशिक भाषाओं को प्रादेशिक राजाओं ने वेग प्रदान किया था ।

  • भक्ति मार्ग के संतों ने लोगों की भाषा में उपदेश दिया । उनमें कबीर और अनेक संतकवियों का समावेश होता है ।
  • इस समय भोजपुरी और अवधी हिन्दी भाषा की मुख्य बोलियाँ थी ।
  • कबीर की रचनाएँ मुख्यतः सधुकुडी लोकबोली में है, उनके दोहे लोकसाहित्य के अंग बने है ।
  • मलिक मुहम्मद जायसी ने अवधी में ‘पद्मावत’ नामक महाकाव्य लिखा ।
  • इसके उपरांत तुलसीदास का प्रसिद्ध ग्रंथ ‘रामचरित मानस’ इस समय अवधी भाषा में लिखा गया ।
  • विजयनगर के सम्राट कृष्णदेव राय संस्कृत और तेलुगु भाषा के महान साहित्यकार थे, जिसने आमुक्तमाल्यदा लिखी थी ।
  • बंगाल के शासकों का आश्रय लेकर कृतिवास ने बंगाली में ‘रामायण’ की रचना की थी, चंडीदास ने सेंकडों गीत लिखे और चैतन्य महाप्रभु ने भक्तिगीतों की परंपरा शुरू की थी ।


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