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मेरा घोड़ा कुछ धीमे चलने लगा । मैंने समझा कि चढ़ाई की थकावट के कारण ऐसा कर रहा है, और उसे मारना नहीं चाहता था । धीरे-धीरे वह बहुत पिछड़ गया और मैं दौन्क्विक्स्तो की तरह अपने घोड़े पर झूमता हुआ चला जा रहा था । जान नहीं पड़ता था कि घोड़ा आगे जा रहा है या पीछे । जब मैं ज़ोर देने लगता, तो वह और सुस्त पड़ जाता । एक जगह दो रास्ते फूट रहे थे, मैं बाएँ का रास्ता ले मील-डेढ़ मील चला गया । आगे एक घर में पूछने से पता लगा कि लङ्कोर का रास्ता दाहिने वाला था । फिर लौटकर उसी को पकड़ा । चार-पाँच बजे के करीब मैं गाँव से मील-भर पर था, तो सुमति इंतज़ार करते हुए मिले ।1. लेखक सुमति से पिछड़ क्यों गये ?2. लेखक किसकी तरह झूमते हुए जा रहा था ?3. लेख्नक लङ्कोर का रास्ता क्यों भटक गये थे ? |
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Answer» 1. लेखक को जो घोड़ा मिला था वह बहुत धीरे-धीरे चल रहा था । साथ ही वे एक जगह रास्ता भटक गये थे इसलिए लेखक सुमति से पिछड़ गये थे । 2. लेखक दोन्क्विक्स्तों की तरह अपने घोड़े पर झूमते हुए जा रहा था । 3. एक जगह से दो रास्ते फूट रहे थे । लङ्कोर का रास्ता दाहिनेवाला था यह लेखक को मालूम न था, अतः लेखक बाएँवाला रास्ता लेकर मील-डेढ़ मील आगे चले गये थे । इसलिए लेखक लङ्कोर का रास्ता भटक गये थे । |
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