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‘मेरा नया बचपन’ कविता का कौन-सा अंश आपकों सबसे अधिक प्रभावित करता है और क्यों ? लिखिए।

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वैसे तो ‘मेरा नया बचपन’ कविता का पूरा कथ्य ही मन को प्रिय लगता है किन्तु मुझे कविता का अंतिम अंश “मैं बचपन को बुला रही थी ………….नवजीवन आया। बहुत प्रभावित करता है। वात्सल्य का ऐसा सहज और मार्मिक शब्द-चित्र दुर्लभ प्रतीत होता है।

यह दृश्य बड़ा नाटकीय और मनमोहक है। यह कोई काल्पनिक प्रस्तुतीकरण नहीं है। यह कवयित्री के प्रत्यक्ष अनुभव का स्वाभाविक प्रकाशन है। कवयित्री अपने बचपन को बुला रही है और अचानक उसकी नन्हीं बिटिया बोल उठती है। सारा दृश्य ही बदल जाता है। कवयित्री की मन-कुटिया नंदनवन बन जाती है।

उसके सामने खड़ा उसका बचपन ‘कुछ मुँह में कुछ लिए हाथ में उससे मिट्टी चखने का अनुरोध कर रहा है। दोनों के बीच बड़े छोटे से संवाद होते हैं-‘माँ काओ’ और ‘तुम्ही खाओ’ परन्तु ये संवाद माँ-बेटी के भावनात्मक संबंधों का मधुर लघु शब्द-चित्र साकार कर रहा है।

यह प्रसंग हमारे घर-वार के एक सुपरिचित और परम प्रिय अंग को उद्घाटित करता है। अत: मुझे भी बहुत आकर्षक लगता है।



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