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'मेरा नया बचपन’ कविता के भाव-सौंदर्य पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। |
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Answer» मेरा नया बचपन’ एक भाव प्रधान रचना है। इस कविता का विषय ही बड़ा भावुकतामय है। बचपन हमारे जीवन का सबसे प्रिय समय होता है। बचपन की बेफिक्री, मस्ती, भेदभावरहित भोलापन ऐसी भावनाएँ है। जिनके लिए हम सारे जीवन तरसते रहते हैं। कवयित्री ने कविता के प्रारम्भ में ही बचपन को अविस्मरणीय समय बताया है। कवयित्री को अपने बचपन की बार-बार याद आती है। वह बिस्तार से बचपन के आनंदों का वर्णन करती है। कवयित्री का यह बचपन के प्रति आकर्षण दिखावटी नहीं है। वह चिंतारहित होकर खेलना-खाना, ऊँच-नीच, छुआ-छूत रहित मस्ती, रोना-मचलना और मनना बचपन की एक-एक घटना को कवयित्री ने बड़ी भावुकता से याद किया है। बचपन से जवानी तक के सफर को भी कवयित्री ने भाव-मग्न होकर ही किया है। अपनी मनोभावनाओं को भावविभोर भाषा-शैली में प्रस्तुत किया है। जवानी को झंझट बताना और बचपन को फिर आने को आमंत्रित करना, पाठकों को भी अपने-अपने बचपनों की स्मृति करा देता है। कविता की अंतिम पंक्तियाँ तो भाव विभूति का चरम प्रकाशन हैं। कवयित्री की नन्ही-सी बिटिया ही उसके बिछुड़े बचपन का रूप लेकर उसकी जिंदगी में आ जाती है और वह स्वयं बच्ची बनकर बचपन के आनंद में मग्न हो जाती है। इस प्रकार ‘मेरा नया बचपन वात्सल्य भाव के मार्मिक अनुभूति को हृदयंगम कराने में पूर्णत: सफल है। |
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