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‘मेरा नया बचपन’ कविता के कला पक्ष पर प्रकाश डालिए।

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‘मेरा नया बचपन’ एक भाव-प्रधान रचना है। कवयित्री ने इसे सजाने-सँवारने का प्रयास नहीं किया है। फिर भी कविता का कला पक्ष भावों के प्रकाशन में सहायक बना है।

कविता की सादगी और प्रवाह से युक्त भाषा इसकी उल्लेखनीय विशेषता है। शब्दावली सरल होते हुए भी भाषा लक्षणा शब्द-शक्ति से बड़ी प्रभावशाली बन गई है।

‘‘लुटी हुई ………………..द्वार पर खड़ी हुई।”
”दिल में एक …………….अकेली थी।” आदि ऐसे ही कथन हैं।
कथन की शैली सरल सपाट गति से आगे बढ़ती जाती है। अनेक अलंकार सहज भाव से आकर कविता की शोभा बढ़ा रहे हैं।
“गया ले गया ……………खुशी मेरी।”
“हे बचपन …………..हँसा दिया तूने।”
“भाग गया था …………..फिर से आया।”
में मानवी करण अलंकार है। बार-बार’, चूम-चूम’ में पुनरूक्ति प्रकाश, किलकारी किल्लोल’, ‘खेलना खाना’ ‘नैन नीर’। ‘मंजुल मूर्ति’ आदि में अनुप्रास तथा ‘नंदनवन सी …….कुटिया मेरी’ में उपमा अलंकार है।

पूरी रचना में वात्सल्य की सरसता साकार हो रही है।



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