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Mघ. नाना साहब कौन थे?ड. झारखंड में 1857 की क्रांति की शुरुआत कब और कैसे शुरू हुई?च. चूटूपालू घाटी में झारखंड के​

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घ . नाना साहेब (जन्म १८२४ - १८५७ के पश्चात से गायब) सन १८५७ के भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम के शिल्पकार थे। उनका मूल नाम 'धोंडूपंत' था। स्वतंत्रता संग्राम में नाना साहेब ने कानपुर में अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोहियों का नेतृत्व किया।

ड . भारत की स्वाधीनता की लड़ाई की शुरुआत 1857 में हुए सिपाही विद्रोह से मानी जाती है। मंगल पाण्डेय के उस सिपाही विद्रोह को भले ही भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम की संज्ञा दी गयी हो लेकिन झारखण्ड के संथाल परगना में अंग्रेजों को उससे पहले वहां के निवासियों का तगड़ा विरोध झेलना पड़ा था।

30 जून 1855 में हुए इस विद्रोह को 'संथाल हूल' या फिर 'संथाल विद्रोह' के नाम से जाना जाता है। इस क्रान्ति के नायक साहेबगंज जिले के भोगनाडीह में जन्मे चार भाई थे। मौजूदा साहेबगंज जिले के भोगनाडीह में सिद्धू ,कान्हू, चाँद और भैरव चार भाइयों ने मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ करो या मरो और अंग्रेजों हमारी मिट्टी छोड़ो का नारा दिया था। झारखण्ड के इतिहासकारों के अनुसार यह भारत की आजादी के लिए लोगों को संगठित करने का पहला अभियान रहा है। झारखण्ड मामले के जानकार भुवनेश्वर अनुज के अनुसार यह आन्दोलन अंग्रेजों के शोषण और दमन की नीतियों के खिलाफ संथाल के लोगों की ओर से किया गया था। वहीं इतिहासकार बी़पी केशरी ने अपनी किताब 'छोटानागपुर का इतिहास' में भी संथाल विद्रोह का जिक्र किया है।

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