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मगर आप चाहे तो चंद गज़लें तरन्नुम के साथ अर्ज कर सकता हूँ।’ इस कथन से आम जनता के साथ गज़लों के रिश्ते का क्या परिचय मिलता है? |
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Answer» आम जनता गज़लों से खूब परिचित थे। गज़ल आम जनता की ही कविता है। वे उसे गाते रहते हैं। क्योंकि उतनी मार्मिकता उसमें है। इसलिए बूढ़ा मल्लाह अब्दुल जब्बार भी शायर गालिब से परिचित थे। गायक न होते हुए भी मल्लाह कुछ गज़लें पेश करने को तैयार भी हुआ। |
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