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Answer» महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धांत के द्वारा वेगनर ने ज जानकारी प्रस्तुत की थी, वह पुराने तर्क पर आधारित थी। वर्तमान में जानकारी के जो स्रोत हैं, वे वेगनर के समय में उपलब्ध नहीं थे। चट्टानों के चुंबकीय अध्ययन और महासागरीय तल के मानचित्रण ने विशेष रूप से निम्न तथ्यों को उजागर किया (क) यह देखा गया कि मध्य-महासागरीय कटकों के साथ-साथ ज्वालामुखी उद्गार सामान्य क्रिया है और ये उद्गार इस क्षेत्र में बड़ी मात्रा में लावा निकालते हैं। (ख) महासागरीय कटक के मध्य भाग के दोनों तरफ समान दूरी पर पाई जाने वाली चट्टानों के निर्माण का समय, संरचना, संघटन और चुंबकीय गुणों में समानता पाई जाती है। महासागरीय कटकों के समीप की चट्टानों में सामान्य चुंबकत्व ध्रुवण पाई जाती है तथा ये चट्टानें नवीनतम हैं। कटकों के शीर्ष से दूर चट्टानों की आयु भी अधिक है। (ग) महासागरीय पर्पटी की चट्टानें महाद्वीपीय पर्पटी की चट्टानों की अपेक्षा अधिक नई हैं। महासागरीय पर्पटी की चट्टानें कहीं भी 20 करोड़ वर्ष से अधिक पुरानी नहीं हैं। महाद्वीपीय पर्पटी के भूकंप उद्गम केंद्र अधिक गहराई पर हैं जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र के भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान हैं। (घ) गहरी खाइयों में भूकंप उद्गम केंद्र अधिक गहराई पर हैं जबकि मध्य-महासागरीय कटकों के क्षेत्र के भूकंप उद्गम केंद्र कम गहराई पर विद्यमान हैं। सागरीय अधःस्तल परिकल्पना चुम्बकीय गुणों के आधार पर हैस ने 1961 में एक परिकल्पना प्रस्तुत की जिसे ‘सागरीय अध:स्तल विस्तार के नाम से जाना जाता है। हैस के तर्कानुसार महासागरीय कटकों के शीर्ष पर लगातार ज्वालामुखी उद्भेदन से महासागरीय पर्पटी में विभेदन हुआ और नया लावा इस दरार को भरकर महासागरीय पर्पटी के दोनों तरफ धकेल रहा है। इस प्रकार महासागरीय अध:स्तल का विस्तार हो रही है। इसके साथ ही दूसरे महासागर के न सिकुड़ने पर हैस ने महासागरीय पर्पटी के क्षेपण की बात कही है। अत: एक ओर महासागरों में पर्पटी का निर्माण होता है तो दूसरी तरफ महासागरीय गर्गों में इसका विनाश भी होता है। प्लेट विवर्तनिक संकल्पना हैस की परिकल्पना के उपरान्त विद्वानों की महासागरों वे महाद्वीपों के वितरण के अध्ययन में फिर से रुचि उत्पन्न हुई। सन् 1967 में मैकेन्जी, पारकर और मोरगन ने स्वतन्त्र रूप से उपलब्ध विचारों को समन्वित कर अध्ययन प्रस्तुत किया, जिसे प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त कहा गया। एक विवर्तनिक प्लेट ठोस चट्टान का विशाल व अनियमित आकार का खण्ड है, जो महाद्वीप व महासागर स्थलमण्डलों के संयोग से बना है। ये प्लेटें दुर्बलतामण्डल पर दृढ़ इकाई के रूप में संवहन धाराओं के प्रभाव से चलायमान हैं। इन प्लेटों द्वारा ही महाद्वीप व महासागरों का वितरण, निर्माण तथा अन्य भूगर्भीय घटनाएँ निर्धारित होती हैं।
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