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“महात्मा गाँधी एक महान् राष्ट्र निर्माता थे।” इस कथन की पुष्टि में तर्क प्रस्तुत कीजिए। |
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Answer» महात्मा गाँधी का परिचय- महात्मा गाँधी भारत की ही नहीं, वरन् विश्व की महान् विभूतियों में से एक थे। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 ई० को काठियावाड़ के एक नगर पोरबन्दर में हुआ था। उनका पूरा नाम मोहनदास करमचन्द गाँधी था। उनके पिता का नाम करमचन्द गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई था। उनके पिता और दादा काठियावाड़ की एक छोटी-सी रियासत के दीवान थे। मैट्रीकुलेशन की परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् वे वकालत की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए इंग्लैण्ड गए और तीन वर्ष पश्चात् वहाँ से सफल बैरिस्टर बनकर भारत लौटे। गाँधी जी के विचार- महात्मा गाँधी वर्तमान युग के एक महान् चिंतक, विचारक और सुधारक थे, जिन्होंने भारतीय सामाजिक जीवन की मूल समस्याओं पर गहन चिंतन व मनन किया। गाँधी जी के राजनीतिक विचार धर्म पर आधारित थे। वे राजनीति में सत्य, अहिंसा, नैतिकता, विश्वबन्धुत्व, त्याग और आत्मविश्वास को महत्त्व देते थे। गाँधी जी ने अपने विचार 1909 ई० में ‘हिन्द स्वराज्य’ नामक पुस्तक में लिखे। गाँधी जी ने सत्याग्रह को सर्वोपरि मानते हुए लिखा है कि “सत्याग्रह एक ऐसा आध्यात्मिक सिद्धान्त है, जो मनुष्य-मात्र के प्रेम पर आधारित है। इसमें विरोधियों के प्रति घृणा की भावना नहीं है।” आगे अहिंसा के बारे में लिखते हैं, “यद्यपि अहिंसा का अर्थ क्रियात्मक रूप से जानबूझकर कष्ट उठाना है….. इस सिद्धान्त को मानने वाला व्यक्ति अपनी इज्जत, धर्म और आत्मा की रक्षा के लिए एक अन्यायपूर्ण साम्राज्य की समस्त शक्तियों को भी चुनौती दे सकता है। अपने पराक्रम द्वारा उसके पतन के बीज भी बो सकता है।” महात्मा गाँधी का साधन और साध्य के बारे में निश्चित मत था कि केवल साध्य ही पवित्र नहीं होना चाहिए बल्कि साधन भी उतना ही पवित्र होना चाहिए। वे साधन और साध्य को बीज और पौधे की भाँति एक-दूसरे से सम्बन्धित मानते थे। उनका मत था कि हिंसा के मार्ग से प्राप्त साधन बाद में नष्ट हो जाएगा। विश्व के इतिहास में उनका यह प्रयोग अलौकिक और कल्पनातीत था। गाँधी जी का भारतीय राजनीति में प्रवेश- भारतीय स्वतन्त्रता के इतिहास में 1919 ई० का वर्ष एक विशिष्ट स्थान रखता है, क्योंकि इसी वर्ष महात्मा गाँधी जैसे महान् व्यक्तित्व ने देश के राजनीतिक आन्दोलन में सक्रिय रूप से पर्दापण किया। उन दिनों प्रथम विश्व युद्ध चल रहा था। युद्ध में गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार की बहुत सहायता की। परन्तु युद्ध की समाप्ति पर रौलेट ऐक्ट के दुष्परिणामों, जलियाँवाला बाग हत्याकांड तथा खिलाफत के प्रश्न के कारण देश में असहयोग आन्दोलन का सूत्रपात किया और कुछ ही वर्षों में उनकी ख्याति सर्वत्र फैल गई। 1919 ई० से लेकर 1947 ई० तक गाँधी जी ने कांग्रेस और राष्ट्रीय आन्दोलन का सफल नेतृत्व किया। इसी कारण उन्हें इसी काल के राष्ट्रीय आन्दोलन का कर्णधार कहा जाता है। देश की राजनीति पर गाँधी जी का व्यापक प्रभाव था। गाँधी जी ने भारत की स्वतन्त्रता के लिए तीन महत्त्वपूर्ण आन्दोलन चलाए थे‘असहयोग आन्दोलन’, ‘सविनय अवज्ञा आन्दोलन’ और ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’। सत्याग्रह और अहिंसा की नीति से ही उन्होंने विश्व की महान् शक्ति ब्रिटिश साम्राज्य का विरोध किया और अन्त में विवश होकर 15 अगस्त, 1947 ई० को अंग्रेजों ने भारत को स्वतन्त्र कर दिया। गाँधी जी के कार्य- गाँधी जी ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर सर्वप्रथम सत्याग्रह आन्दोलन 1917 ई० में बिहार चम्पारन में तथा दूसरा सत्याग्रह आन्दोलन 1918 ई० में गुजरात के खेड़ा में चलाया। महात्मा गाँधी द्वारा किसानों का समर्थन करने के कारण सरकार को झुकना पड़ा। सन् 1918 ई० में महात्मा गाँधी ने अहमदाबाद मिल मजदूरों की समस्या को अनशन द्वारा समाप्त कर दिया। अपने इन कार्यों के कारण महात्मा गाँधी ने भारतीय समाज के निर्बल वर्ग से अपना तादात्मय स्थापित कर लिया व भारतीय राजनीति में एक नैतिक शक्ति के रूप में सामने आए। सामाजिक जागरण में महात्मा गाँधी का योगदान- गाँधी जी ने सामाजिक न्याय की भावना बड़ी प्रबल थी। उनके हृदय में भारत की शोषित और दलित जातियों के प्रति विशेष सहानुभूति, प्रेम और सहयोग की भावना थी। उन्होंने अछूतों के पक्ष में आवाज उठाई और उनके हितों को सुरक्षित करने के लिए हर सम्भव प्रयास किया। महात्मा गाँधी ने इन्हें ‘हरिजन’ कहकर सम्मानित किया। उन्होंने इसी उद्देश्य से ‘हरिजन’ नामक पत्रिका भी प्रकाशित कराई, जिनके माध्यम से वे छुआछूत के विरुद्ध प्रभावशाली लेख प्रकाशित करते रहते थे। इसके साथ ही उन्होंने हिन्दुओं को हरिजनों के प्रति उदार होने की प्रेरणा दी और मन्दिरों के द्वार हरिजनों के लिए खोल देने को कहा। उपर्युक्त सुधारों के अतिरिक्त महात्मा गाँधी साम्प्रदायिकता के घोर विरोधी थे और हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रबल समर्थक थे। उनकी यह पंक्ति आज भी हमारे हृदय को झंकृत कर देती है, “ईश्वर अल्ला एक ही नाम। सब को सन्मति दे भगवान।” वे चाहते थे कि उनके देशवासी प्रेम और शान्ति से रहें। वे मानवता के सच्चे हितैषी थे। इस दृष्टि से महात्मा गाँधी को आधुनिक भारत का युग-पुरुष एवं राष्ट्रनिर्माता कहना सर्वथा उचित है। |
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