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“मन करता है” पाठ में कई बाल सहज कल्पनाएँ हैं। उनका वर्णन कीजिए।

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मन करता है पाठ में कई बाल सहज कल्पनाएँ हैं। सूरज बनकर आसमान में दौड़ लगाना। चंदा बनकर तारों पर अकड़ दिखाना। तितली बनकर दूर – दूर तक उड़ता जान। कोयल बन कर मीठे – मीठे बोल सुनाना। चिड़िया बनकर ची – ची, चूँ चूँ शोर मचाना। चरखी लेकर पीली लाल पतंग उडाना आदि बाल सहज कल्पनाएँ बालक करते हैं।



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