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मनरेगा कार्यक्रम का सामाजिक महत्त्व बताइए। |
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Answer» मनरेगा का सामाजिक महत्त्व मनरेगा के अन्तर्गत एक वित्तीय वर्ष के दौरान ऐसे सभी ग्रामीण परिवारों को जिनके वयस्क सदस्य अकुशल श्रम करने को तैयार हों। कम-से-कम 100 दिनों का गारण्टी मजदूरी देने का प्रयास किंया जाता है। इस रूप में मनरेगा अन्य श्रमिक रोजगार कार्यक्रमों से अलग किस्म का है क्योंकि इसके द्वारा ग्रामीण लोगों को एक संसदीय अधिनियम के द्वारा रोजगार पाने का वैधानिक अधिकार और गारण्टी प्राप्त है। यह अन्य श्रम रोजगार योजनाओं जैसा नहीं है। अपने अधिकार आधारित ढाँचे तथा माँग-आधारित तरीके द्वारा मनरेगा पिछली रोजगार योजनाओं की तुलना में एक भिन्न परिवर्तन का अग्रदूत है। इस योजना की विशेषताओं में शामिल हैं। समयबद्ध रोजगार गांरटी और 15 दिनों के अन्दर मजूदरी का भुगतान तथा मजदूर संकेद्रित कार्य पर जोर जिसमें कॉन्टेक्टरों और मशीनरी के प्रयोग का निषेध किया गया है। योजना की कम-से-कम 33 प्रतिशत हितग्राही महिलाएँ होंगी। इस दृष्टि से समाज में महिलाएँ आर्थिक दृष्टि से भी सुदृढ़ होंगी। मनरेगा के अन्तर्गत मजदूरी का भुगतान बैंक एवं डाकघर खाते के माध्यम से किया जाना जरूरी है। इस योजना से गरीबों के आर्थिक समावेश में सहायता मिल रही है। मनरेगा का मुख्य ध्यान जल संरक्षण, सूखा निवारण (वन संवर्द्धन/वृक्षारोपण सहित), भूमि विकास, बाढ़ नियन्त्रण/सुरक्षा (जल-जमाव वाले क्षेत्रों में नालियों के विकास सहित) तथा सभी मौसमों में गाँवों को सड़क से जोड़ने इत्यादि से सम्बन्धित कार्यों पर है। इन कार्यों से निश्चित रूप से समाज को बड़ा लाभ मिलेगा। भविष्य की योजनाएँ बनाने, प्रोजेक्ट शेल्फ के अनुमोदन तथा लागत के कम-से-कम 50 प्रतिशत तक के अनुपात में कार्यों को लागू किए जाने के माध्यम से मनरेगा के नियोजन, कार्यान्वयन और उनकी निगरानी की दृष्टि से पंचायतों की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। इससे यह पता चलता है कि यह अधिनियम विकेन्द्रीकरण को मजबूत बनाने तथा निम्नतम स्तर पर लोकतान्त्रिक संरचना को दृढ़ करने के लिए भी एक महत्त्वपूर्ण साधन है। |
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