यह पंचकोणीय पैमाने मोहनम और मेलाकार्ता राग पैमाने कल्याणी का संयोजन है। इस रागम को 29 वें मेलाकार धीरशंकरभरणम के ज्ञाता, बिलहरी के बराबर एक प्रथि मध्यमा के रूप में माना जा सकता है। हिंदुस्तानी संगीत में मोहनकल्याणी के समकक्ष भूप कल्याण या शुद्ध कल्याण है।