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Answer» वस्तु विनिमय प्रथा जब अमल में थी तब मूल्य संग्रह और विनिमय को सरल बनाने के लिए पशुओं को सर्वसामान्य माध्यम के रूप उपयोग किया । - भारत में पशुओं में भी विशेष गाय को धन के रूप में माना गया ।
- कृषि प्रधान भारत में अनाज का उपयोग के बाद बचे हुए अनाज से पशुओं को खरीदा जाता था ।
- आवश्यकता पड़ने पर पशुओं को बेचकर अनाज पुनः खरीद लेते थे ।
- इस प्रकार अनाज बेचकर पशु खरीदता और पशुओं के द्वारा अन्य आवश्यकताएँ पूरी करते थे । इस प्रकार गाय, भैंस, घोड़ा जैसा पशु विनिमय का माध्यम और संग्राहक बने ।
- पशु बीमार हों, मृत्यु हों, दीर्घकालीन समय उसी स्वरूप में भी मूल्य संग्रह संभव नहीं था । एक सीमा के बाद पशु संग्रह भी कठिन बना । स्थानांतरण का कार्य कठिन बना ।
- पशु विनिमय की मर्यादा के कारण इनके स्थान पर कीमती पत्थरों का उपयोग होने लगा ।
- राजाशाही युग आने पर सिक्के शुरु हुये और राजधानी तथा शहरों में सिक्कों का विनिमय के रूप में उपयोग होने लगा ।
- सिक्कों का विनिमय के रूप में उपयोग सीमित विस्तारों में होता था ।
- लोकतंत्र का उद्भव तथा औद्योगीकरण आधुनिक द्रव्य या मुद्रा के स्वरूप के लिए प्रेरक बना ।
- केन्द्रीय सत्ता के समर्थन से प्रकाशित मुद्रा को सर्वस्वीकृति मिली ।
- विनिमय के माध्यम रूप में मुद्रा को मान्यता मिली ।
- मूल्य के संग्रह में भी आधुनिक मुद्रा अधिक सफल रही ।
- बैंकिंग व्यवसाय के विकास से मूल्य संग्रह तथा स्थानांतरण शीघ्र और सरल बना ।
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