| 1. |
मुद्रास्फीति का अर्थ बताकर उसके कारणों की चर्चा कीजिए । |
|
Answer» सामान्य रूप से भाववृद्धि अर्थात् मुद्रास्फीति : मुद्रास्फीति एक आर्थिक समस्या है और मौद्रिक घटना है । सामान्य प्रजा वस्तुओं की कीमत वृद्धि को मुद्रास्फीति मानती है । परंतु अर्थशास्त्र में मुद्रास्फीति का अर्थ निम्नानुसार है : मुद्रास्फीति के कारण निम्नानुसार हैं : (1) मांग में वृद्धि : अर्थतंत्र में मांग बढ़ने से सर्जित मुद्रास्फीति को मांग प्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं । वस्तु की मांग में वृद्धि हो . और वस्तु की पूर्ति में वृद्धि न हो तब वस्तु की कीमत में वृद्धि होती है । जिसके लिए मांग जवाबदार मानी जाती है । वस्तु की मांग में वृद्धि के निम्नलिखित कारण : (i) मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि : मुद्रास्फीति एक मुद्राकीय घटना है । देश में मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि होने से लोगों की आय में वृद्धि होती है । परिणाम स्वरूप वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ती है । दूसरी ओर वस्तु और सेवा की आपूर्ति स्थिर रहती है । जिससे उनकी कीमत घटती है, जिसे मुद्रास्फीति सर्जित होती है । (ii) सरकार के. सार्वजनिक खर्च में वृद्धि : भारत जैसे विकासशील देशों में सरकार आर्थिक विकास की प्रक्रिया में जुड़ती है । आंतरिक ढाँचे के निर्माण, आवश्यक आधारभूत सेवाएँ उपलब्ध करवाना या रोजगारी सर्जन के लिए सरकार सार्वजनिक खर्च करती है । जिससे देश में मुद्रा की आपूर्ति में वृद्धि होती है । लोगों की आय में वृद्धि होती है, मांग में वृद्धि होने से कीमत में वृद्धि होती है । यदि सरकार देश में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन की अपेक्षा बड़े पैमाने पर मुद्रा आपूर्ति अर्थतंत्र में करे, सार्वजनिक खर्च करे तो मुद्रास्फीति अधिक गति से बढ़ती है । (iii) जनसंख्या में वृद्धि : भारत में औसत जनसंख्या वृद्धिदर 2 प्रतिशत है । जिसके कारण मांग में वृद्धि का दबाव खड़ा हुआ है । निरंतर जनसंख्या वृद्धि के कारण दैनिक उपभोग की वस्तुओं की मांग में वृद्धि होती है, और बढ़ती हुयी जनसंख्या की मांग यदि पूरी नहीं हो तब भावस्तर बढ़ता है । जनसंख्या स्थिर हो परंतु उसी आय बढ़े तो भी मांग में वृद्धि होती है परिणाम स्वरूप मुद्रास्फीति में वृद्धि होती है । (2) खर्च में वृद्धि : खर्च में वृद्धि के कारण सर्जित मुद्रास्फीति को खर्चप्रेरित मुद्रास्फीति कहते हैं । खर्च प्रेरित मुद्रास्फीति में विभिन्न वर्गों का समावेश होता है । कीमत को प्रभावित करनेवाले तत्त्वों में मांग के साथ पूर्ति भी जवाबदार होती है । पूर्तिलक्षी अर्थशास्त्र के समर्थक मानते हैं कि उत्पादन खर्च में वृद्धि हो तो भी वस्तुओं की कीमत में वृद्धि होती है । उत्पादन खर्च में निम्नलिखित खर्च का समावेश होता है : कच्चे माल की कीमत में वृद्धि इन सभी वर्गों के कारण वस्तु और सेवाओं की कीमत में वृद्धि होती है जिससे मुद्रास्फीति सर्जित होती है । (3) अन्य कारण : मुद्रास्फीति के मूल में दो कारण ही जवाबदार है । (i) करनीति : सरकार की टेक्सनीति में परिवर्तन हो, विशेष सरकार वस्तुओं और सेवाओं पर ऊँची दर से टेक्स बढ़ाये तब वस्तु का उत्पादन खर्च और कीमत में वृद्धि होती है । इस प्रकार ऊँची कर दर मुद्रास्फीति के लिए जवाबदार बन सकती । (ii) आयाती वस्तुओं की कीमत में वृद्धि : भारत में बहुत सारी वस्तुओं का आयात होता है । और अन्तर्राष्ट्रीय बाज़ार में कीमत बढ़ने से मुद्रास्फीति सर्जित होती है । (iii) अभाव : जब कच्चा माल, बिजली या उत्पादन के लिए आवश्यक किसी भी बात की कमी खड़ी हो तब कीमत में वृद्धि होती है । उत्पादन प्रक्रिया में सम्मलित कोई भी घटना व्यापक और दीर्घकालीन कमी मुद्रास्फीति के लिये जवाबदार है । |
|