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“मुगल शासक स्थापत्य कला के संरक्षक थे।” स्पष्ट कीजिए।

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मुगल शासन में भारत में स्थापत्य कला का बहुमुखी विकास हुआ। मुगलों ने शानदार किलों, राजमहलों, दरवाजों, सार्वजनिक इमारतों, मस्जिदों, मकबरों आदि का निर्माण करवाया। इस दृष्टि से मुगलकाल को गुप्तकाल के बाद उत्तर भारत का दूसरा स्वर्ण-युग कहा जा सकता है। मुगलों की स्थापत्य कला ने भारतीय स्थापत्य के इतिहास में नवीन युग का प्रादुर्भाव किया। इस युग में मध्य एशियाई तथा भारतीय दोनों शैलियों का समन्वय हुआ जो अकबर के समय में चमत्कर्ष पर पहुंच गया। अकबर के काल में इस्लामी और हिन्दू कला के मिश्रण से स्थापत्य कला का विकास हुआ। शेरशाह का मकबरा, बुलन्द दरवाजा, ताजमहल, आगरा का लाल किला, दिल्ली का लाल किला, जामा मस्जिद, अकबर का मकबरा, मोती मस्जिद आदि मुगलकाल की स्थापत्य कला के उदाहरण आज भी विद्यमान हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि मुगल शासक स्थापत्य कला के संरक्षक थे।



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