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मुगलकाल में हिन्दी साहित्य की प्रगति का विवरण दीजिए। |
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Answer» मुगलकाल में फारसी साहित्य के समान हिन्दी साहित्य की भी खूब उन्नति हुई। अकबर की सहिष्णुता नीति से हिन्दी साहित्य अत्यन्त समृद्ध हुआ। राजा बीरबल, राजा मानसिंह, राजा भगवान दास, नरहरि और हरिनाथ अकबर के राजदरबार से सम्बन्धित विद्वान थे। नन्ददास, बिट्ठलनाथ, परमानन्ददास आदि कवियों के व्यक्तिगत प्रयत्नों ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाया। इस काल में तुलसीदास ने 25 ग्रन्थों की रचना की जिसमें ‘रामचरितमानस’ और ‘विनय पत्रिका प्रमुख है। सूरदास ने ‘सूससागर’ रहीम ने ‘रहीम सतसई’ और रसखान ने ‘प्रेमवाटिका’ नामक ग्रन्थों की रचना। की। जहाँगीर का भाई हिन्दी में कविता करता था। शाहजहाँ के संरक्षण में सुन्दर कविराम, कविन्द्र आचार्य, शिरोमणि मणि बनारसीदास आदि हिन्दी के विद्वान थे। |
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