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मुगलकाल में कृषकों की दशा का वर्णन कीजिए।

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सदैव की भाँति मुगलकाल में भी भारत का प्रमुख व्यवसाय खेती था। सिंचाई के उपयुक्त साधनों के अभाव में कृषक अधिकतर प्रकृति पर निर्भर रहते थे। अतिवृष्टि या अनावृष्टि के समय दुर्भिक्ष पड़ने पर कृषकों की दशा अत्यन्त दयनीय हो जाती थी। सरकार की सहायता मिलने पर भी उनकी दशा में कोई विशेष सुधार नहीं होता था। दुर्भिक्ष के अतिरिक्त बहुधा युद्धों और सेनाओं के आगमन के कारण भी कृषकों को काफी कष्ट उठाना पड़ता था। बादशाह की निरन्तर चेतावनी के बाबजूद भी कई बार सैनिक उनके खेतों को रौंद डालते थे।



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