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मुगलकाल में स्त्रियों की दशा पर संक्षिप्त टिप्पणी कीजिए।

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मुगलकाल में स्त्रियों का कोई स्थान नहीं था। वे केवल विलास के लिए उपयुक्त समझी जाती थीं। बहु विवाह प्रथा, पर्दा प्रथा, तथा अशिक्षा के दुर्दशों ने स्त्री-समाज को पतित बना दिया था। तदापि कुछ प्रसिद्ध स्त्रियाँ इस काल में हुई, जिनमें गुलबदन बेगम, नूरजहाँ, जहाँआरा, रोशनआरा तथा जेबुन्निसा के नाम उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त अहमदनगर की चाँदबीबी, गोंडवाना की दुर्गाबाई, शिवाजी की माता जीजाबाई तथा राजाराम की विधवा ताराबाई भी नारी रत्न थीं, जिन्होने अपनी प्रतिभा प्रदर्शित कर ख्याति प्राप्त की। हिन्दू स्त्रियों में बाल-विवाह, सती–प्रथा आदि अनेक कुप्रथाएँ विद्यमान थीं, जिनके कारण उनका समाज में घोर अध:पतन हो रहा था।



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