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मुगलकालीन चित्रकला पर प्रकाश डालिए। |
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Answer» भवन निर्माण कला के समान ही चित्रकला को भी मुगल सम्राटों ने राजाश्रय प्रदान किया। बाबर और हुमायूं चित्रकला के शौकीन थे। अकबर को चित्रकला से विशेष अनुराग था। अकबर ने चित्रकला में भी देशी तथा विदेशी तत्वों का सुन्दर सम्मिश्रण करने में सफलता प्रदान की। फतेहपुर सीकरी की दीवारों पर उसने सुन्दर चित्रकारी करवाई। दरबार में साप्ताहिक प्रदर्शनियों की व्यवस्था करके उसने चित्रकला को प्रोत्साहन दिया। जहाँगीर का काल मुगल चित्रकला का स्वर्ण-युग था। जहाँगीर स्वयं चित्रकार था। इस समय चित्रकला में नवीनता, मौलिकता, स्वाभाविकता, गतिशीलता एवं सजीवता थी। प्राकृतिक दृष्यों का सूक्ष्म, भावपूर्ण तथा स्वाभाविक चित्रण एवं व्यक्ति चित्र और युद्धों व आखेट के चित्रों का निर्माण इस कला की विशेषता थी। शाहजहाँ के उत्तराधिकारी औरंगजेब के काल में चित्रकला का पतन हो गया। इस्लाम धर्म का कट्टर अनुयायी होने कारण व किसी भी कला को राजाश्रय प्रदान करना पाप समझता था। उसने अपने दरबार के सभी चित्रकारों को निकलवा दिया। बीजापुर के महल और सिकंदरा में अकबर के मकबरें की चित्रकारी को नष्ट करवा दिया। मुगलकाल की चित्रकला शैली की दृष्टि से सजीव एवं स्वाभाविक है। मुगलकाल के चित्र हिन्दूकाल के चित्रों के समान धार्मिक भावनाओं पर आधारित नहीं थे। इन चित्रों को दरबारी चित्र कहा जा सकता था। मुगलकाल के चित्रकारों में मीर सैयद, अब्दुल समद, फारुख बेग, जमशेद दशवन्त, हरिवंश, जगन्नाथ, धर्मराज, उस्ताद मंसूर विशनदान, मनोहर आदि प्रमुख थे। |
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