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Answer» बिहार के पटना जिले में बडगाँव में प्राचीन नालंदा विद्यापीठ आया हुआ था । - भारतीय संस्कृति में बौद्ध और जैन परंपरा में नालंदा का महत्त्व अधिक है ।
- इस विद्यापीठ में महावीर स्वामी ने चौदह चातुर्मास किया जाने से इस स्थल ने जैन तीर्थस्थल के रूप में स्थान प्राप्त किया ।
- पाँचवी सदी में कुमारगुप्त ने यहाँ एक विहार बनाया था । उसके बाद नालंदा की प्रसिद्धि में वृद्धि हुई थी ।
- तब हस्तलिखित ग्रंथ का अमूल्य भंडार था । नालंदा विश्व विद्यालय भारतीय संस्कृति का एक तीर्थधाम था ।
- देश-विदेश के विद्यार्थी यहाँ अध्ययन करने आते थे । महान यात्री युएन-श्वांग भी यहाँ आया था ।
- नालंदा से पढ़कर बाहर निकले विद्यार्थी भारत का आदर्श विद्यार्थी माना जाता है । ई.स. 5वी से ग्यारहवीं सदी के दरमियान नालंदा शिक्षण का सर्वोच्च स्थान था ।
- उस समय भारत में विश्वभर में श्रेष्ठतम माने जानेवाले ग्रन्थालय थे । युएन-श्वांग ही 657 हस्तलिखित ग्रंथ अपने साथ चीन ले गया था ।
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