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Naukri pesha abhibhavak ok bacchon ke Palan ki samasya par Prakash daliye

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शा अभिभावकों के बच्चों के पालन की भी अपनी समस्यायें होती हैं। आज महंगाई के इस युग में घर चलाने के लिए मां और बाप दोनों को काम करना पड़ता है इस कारण उनका अधिकतर समय बाहर अपने कार्यालय आने-जाने में ही लग जाता है और वो अपने बच्चों पर उतना ध्यान नही दे पाते हैं। कार्यालय से देर से आते हैं फिर अपने घर के काम मे लग जाते हैं या कार्यालय का कोई काम घर पर ही करने लगते हैं, जिससे उनका अपने बच्चों से संवाद कम हो पाता है। बच्चे मात-पिता के प्रेम और स्नेह के भूखे होते हैं। वो चाहते हैं कि उनके माता-पिता उनसे प्यार से बातें करें, उनसे उनकी समस्यायें पूछें। लेकिन माता-पिता अपनी व्यस्तता के कारण बच्चों पर उतना ध्यान नही दे पाते।नौकरीपेशा अभिभावकों के बच्चों के लालन-पालन में एक समस्या ये भी आती है कि बच्चा अंतर्मुखी बन जाता है क्योंकि उसे अपने माता-पिता से मनोवांछित देखभाल नही मिल पाती और बच्चे अपने माता-पिता से मिलने वाले प्यार को किसी अन्य में तलाशने लगते हैं। धीरे-धीरे उसमें हीन-भावना जन्म लेने लगती है।  ऐसे बच्चों की किसी गलत संगत में जाकर भटकने की संभावना हो सकती है।नौकरी पेशा अभिभावक अपने बच्चों की धन के विषय में कोई कमी नही रखते और उनकी हर जरूरत पूरी करते हैं लेकिन खाली धन से परवरिश नही होती। बच्चों को अच्छे संस्कार, बेहतर मार्गदर्शन, प्रेम, अपनत्व आदि भी चाहिये होता है।नौकरीपेशा अभिभावक यदि चाहे तो समय का सही ढंग से नियोजन कर अपने बच्चों को पर्याप्त समय दे सकते हैं और अपने बच्चों का लालन-पालन बेहतरीन ढंग से कर सकते हैं।



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