1.

नदी निकलती है पर्वत से,मैदानों में बहती है।और अंत में मिल सागर से,एक कहानी कहती है।बचपन में छोटी थी पर मैं,बड़े वेग से बहती थी।आँधी-तूफान, बाढ़-बवंडर,सब कुछ हँसकर सहती थी।मैदानों में आकर मैने,सेवा का संकल्प लिया।और बना जैसे भी मुझसे,मानव का उपकार किया।कविता का अर्थ लिखिऐ​

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MANAV ko upkar kar kay apnay jiwan KA SAHI upyog KARNA cahiye



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