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Neend ko nikat rakhne ke kya kya labh hai

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एक अध्ययन में पता चलता है कि नींद की गोलियों के बजाय अनिद्रा (इन्सोमनिया) का उपचार थेरेपी से किया जाना चाहिए। अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों को नींद न आने की शिकायत है उनकी स्थिति को ठीक करने और उन्हें सोने में मदद करने के लिए दवा के बजाय थेरेपी ज्यादा कारगार है। कनाडा में क्वींस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि थेरेपी ज्यादा बेहतर है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी नींद के लिए ली जाने वाली दवाओं से कहीं ज्यादा प्रभावी है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (संज्ञानात्मक व्यवहारपरक चिकित्सा) मनोचिकित्सा की एक पद्धति है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करना है। अध्ययन में पता चला कि दवाओं के मुकाबले थेरेपी से नींद में अधिक सुधार हुआ।Explanation:



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