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निबन्ध : बालचर |
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Answer» सारे समाज की नि:स्वार्थ सेवा करने वाले बालचर (Boy Scout) को आज कौन नहीं जानता? वे अपनी सेवा, सहानुभूति, देश-प्रेम और कर्तव्यनिष्ठा से ही सबको मोह लेते हैं। बालचर संस्था का जन्म आज से लगभग 85 वर्ष पूर्व हुआ। दक्षिण अफ्रीका के बोयर युद्ध में हजारों सैनिक घायल हुए थे, उनके उपचार को कोई उचित साधन भी नहीं था। सर राबर्ट बेडेन पावेल यह सब न देख सके। उन्होंने ही सबसे पहले ‘बालचर संगठन’ बनाकर घायलों की सेवा की। भारतवर्ष में इस संस्था की स्थापना श्रीमती एनी बेसेण्ट ने की थी। आठ वर्ष की आयु का या उससे अधिक आयु का प्रत्येक बालक इसका सदस्य हो सकता है। आयु के अनुसार ही उन्हें शेरबच्चा, ‘बालचर’ या ‘रोबर्स’ के नाम से पुकारते है।स्काउट कहलाने में । उसे विशेष गौरव का अनुभव होता है। बालचरों को उनके कर्तव्य का ठीक-ठीक ज्ञान कराया जाता है। इसके नेता को पेट्रोल लीडर’ कहते हैं। चार या उससे अधिक पेट्रोल मिलाकर एक ‘टुप’ कहलाता है। इसके नेता को ‘टुप लीडर’ कहते हैं। उन्हें प्रशिक्षित करने के लिए बालचर शिक्षक होता है। जिले के सभी टुप जिला स्काउट कमिश्नर के अधीन कार्य करते हैं। इस प्रकार एक बालचर से लेकर पूरे टुप तक को सुसंगठित करके रखा जाता है। समस्त बालचरों की वेशभूषा भी एक समान होती है। उनके सिर पर पगड़ी टोपी या हैट होता है तथा वे खाकी कमीज, नेकर तथा कपड़े के जूते पहनते हैं उनके गले में एक तिकोना रूमाल (स्कार्फ) भी बँधा होता है। वे एक सीटी, झण्डी, रस्सी तथा चाकू भी साथ रखते हैं, जिससे संकट के समय में वे सहायता कर सकें। मानव समाज की तन, मन और धन से सहायता करने को तैयार रहना प्रत्येक बालचर का प्रथम कर्तव्य होता है। वह उदार, आज्ञाकारी, नम्र, दयालु, परोपकारी, धैर्यवान तथा परिश्रमी होता है। बालचरों को दी जाने वाली प्रमुख शिक्षाएँ इस प्रकार हैं-भोजन बनाना, तैरना, नदी पर पुल बनाना, घायल को पट्टी बाँधना, प्रारम्भिक चिकित्सा करना, घायल को अस्पताल पहुँचाना, गाँठ लगाना, मार्ग ढूँढ़ना, संकेतों द्वारा संदेश भेजना, सामयिक घर और सड़क बनाना आदि। प्रत्येक बालचर अपने साथ एक डायरी रखता है, जिसमें वह अपने दिनभर के कार्यों को मुख्य रूप से लिखता है। वह कठिनाइयों को हँसते-हँसते पार कर लेता है। गर्मी, शीत, वर्षा या अग्नि आदि बालचर को उसके कर्तव्य-पथ से विचलित नहीं कर सकते। बालचर संस्था समाज के लिए बड़ी ही उपयोगी है। बड़े-बड़े मेलों, रामलीला तथा बड़ी-बड़ी सभाओं आदि में बालचर अनुशासन और प्रबन्ध को बनाए रखने में बड़े सहायक सिद्ध होते हैं। खोए बच्चों को उनके माता-पिता के पास पहुँचाना, डूबते को बचाना, आग से जान तथा माल की रक्षा करना आदि बालचरों के प्रशंसनीय कार्य हैं। वास्तव में यह संस्था समाज के लिए बड़ी ही उपयोगी है। इसके द्वारा चरित्र, स्वास्थ्य तथा सेवा की उच्च शिक्षा प्राप्त होती है। अतः इसका प्रसार तथा प्रचार होना अत्यन्त आवश्यक है। प्रत्येक विद्यालय में अनिवार्य रूप से बालचर संस्था होनी चाहिए तथा उनके प्रशिक्षण का उचित प्रबन्ध होना चाहिए, जिससे हमारे बालक देश के सुयोग्य नागरिक बन सकें। |
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