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निबन्ध : चलचित्र |
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Answer» आधुनिक युग में चलचित्र विज्ञान की एक बड़ी देन है। आज यह मनोरंजन का लोकप्रिय साधन हो गया है। आज देश का कोई भी ऐसा नगर नहीं है जहाँ दो-चार सिनेमाघर न हों। चलचित्र का आविष्कार सन् 1870 ई० में अमेरिका के एक वैज्ञानिक एडीसन ने किया था। उस समय केवल मूक चित्र ही दिखाए जाते थे। धीरे-धीरे बोलते हुए चित्र भी दिखाए जाने लगे और अब तो रंगीन चित्र इस प्रकार दिखाए जाते हैं कि ऐसा लगता है मानो सचमुच का नाटक ही देख रहे हों। चलचित्र तैयार करने वाले लोग मूवी कैमरे की सहायता से अभिनेताओं के चित्र खींचते हैं और उसी रील पर उनकी ध्वनि भी अंकित कर ली जाती है। सिनेमा हाल में प्रोजेक्टर की सहायता से इसी रील को दिखाया जाता , है। भारतवर्ष में मुम्बई, मद्रास और कलकत्ता में अनेक फिल्मी कम्पनियाँ आजकल फिल्में तैयार कर रही हैं। चलचित्र से निम्नलिखित लाभ हैं आज सिनेमा मनोरंजन का सर्वश्रेष्ठ साधन माना जाता है। मनुष्य चाहे कितना ही थका क्यों न हो, सिनेमा, देखकर मन प्रसन्न हो जाता है। यही कारण है कि आज संसार के करोड़ों व्यक्ति प्रतिदिन सिनेमा देखने जाते हैं। सिनेमा देखने से दर्शकों को नई-नई बातों का पता लगता है। शिक्षा और समाज-सुधार के क्षेत्र में तो सिनेमा बहुत कार्य कर रहे हैं। आजकल तो भूगोल, इतिहास तथा नागरिक शास्त्र आदि अनेक विषयों की शिक्षा भी सिनेमा के द्वारा दी जाने लगी है। यदि अच्छी फिल्में छात्रों को दिखाई जाएँ तो इनसे बहुत लाभ हो सकता है। चलचित्र के द्वारा व्यापारी अपनी वस्तुओं का प्रचार भी करते हैं। साबुन, दवाइयाँ, तेल, कपड़ा तथा अन्य वस्तुओं के विज्ञापन जब चित्रपट पर दिखाए जाते हैं तो उनका व्यापार पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। आज इस व्यवसाय से लाखों व्यक्ति धन कमा रहे हैं। सिनेमा से आजकल लाभ के स्थान पर हानि अधिक हो रही है। मारधाड़ की फिल्में छात्रों को मारधाड़ करने के लिए प्रेरित करती हैं। आज अनेक विद्यार्थी तो स्कूल से पढ़ाई के घण्टे छोड़-छोड़कर सिनेमा देखने जाते हैं और अपना सब कुछ चौपट कर डालते हैं। अधिक सिनेमा देखने में उनके स्वास्थ्य और चरित्र दोनों का नाश होता है। इस प्रकार चलचित्र से समाज को लाभ के स्थान पर हानि भी हो रही है। देश के स्वतन्त्र होने पर नेताओं, समाज-सुधारकों और फिल्म तैयार करने वालों का ध्यान इस ओर गया है और अब तक अनेक शिक्षाप्रद फिल्में तैयार हो चुकी हैं। देश-प्रेम और समाज-सुधार सम्बन्धी फिल्मों को सरकार सहायता भी देने लगी है किन्तु अभी तक इस ओर विशेष सुधार नहीं हुआ है। यदि चलचित्र द्वारा चरित्र गठन और देश-प्रेम की शिक्षा दी जाए तो इससे देश का बहुत उपकार हो सकता है। |
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