1.

निबन्ध : देशाटन

Answer»

‘देशाटन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- देश + अटन। ‘अटन’ शब्द का अर्थ ‘घूमना’ है। इस प्रकार देशाटन शब्द का अर्थ ‘देश-विदेश में भ्रमण करना है।’

प्राचीनकाल से ही लोग देशाटन करते आ रहे हैं। प्राचीन काल में लोग पैदल, घोड़ों पर या रथों पर यात्राएँ किया करते थे। उस समय देशाटन करना बड़ा कठिन था। पचास या सौ मील दूर जाने में कई दिन लग जाते थे और मार्ग में लुट जाने का भी डर रहता था। इसीलिए पहले समय में लोग देशाटन के लिए बहुत कम जाया करते थे।

आधुनिक काल में देशाटन के नए-नए साधन उपलब्ध हो गए हैं। आज तो मोटर, रेलगाड़ी, हवाई जहाज आदि अनेक आने-जाने के साधन उपलब्ध हो गए हैं। इन सबके कारण देशाटन करना बड़ा सरल हो गया है। अब तो हजारों मील तक की यात्रा एक दिन में पूरी हो सकती है और मार्ग में लुट जाने का भय भी नहीं रहा है। इसीलिए आजकल लोग देशाटन को बहुत जाते है।

देशाटन का सबसे बड़ा लाभ ज्ञान-वृद्धि है। जब कोई यात्री किसी दूसरे देश की यात्रा करता है तो वहाँ जाकर नई-नई बातें देखता है और उन्हें सीखता है, इस प्रकार उसका ज्ञान बढ़ता है। देशाटन का एक प्रमुख लाभ मनोरंजन भी है। बहुत से लोग तो केवल मन को प्रसन्न करने के लिए ही देशाटन किया करते हैं। नई-नई वस्तुएँ तथा स्थानों को देखकर जहाँ ज्ञान बढ़ता है, वहाँ मनोरंजन भी होता है।

देशाटन का एक लाभ यह भी है कि देशाटन का स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। गर्मियों में लोग प्रायः पहाड़ी क्षेत्रों की यात्राएँ किया करते हैं। जिन देशों में बहुत अधिक ठण्ड पड़ती है, उन देशों के लोग ठण्ड के दिनों में गर्म देशों में आ जाते हैं। इसका उनके स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।

देशाटन में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से मिलता है। इससे उनमें व्यवहार कुशलता आती है। वह दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करना भी सीख जाता है। इस प्रकार देशाटन से व्यक्ति को अनेक लाभ होते हैं।

आज भी देशाटन के मार्ग में अनेक बाधाएँ आती हैं। सबसे पहली बाधा धन की है। यदि पास में धन की कमी हो तो देशाटन का पूरा-पूरा लाभ नहीं उठाया जा सकता। परिवार और व्यापार की चिन्ताएँ भी देशाटन के मार्ग में बाधक बन जाती हैं। अतः इन सब बाधाओं को पार करके ही देशाटन करना उचित है। इसके अतिरिक्त जिस देश की यात्रा करनी हो, वहाँ की भाषा का भी ज्ञान प्राप्त कर लेना चाहिए अन्यथा बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है।

अन्त में कहा जा सकता है कि देशाटन करना बहुत ही लाभदायक और आवश्यक है। विश्व के अनेक महापुरुष देशाटन के कारण ही महान बन सके हैं। राहुल सांकृत्यायन तथा मोहन राकेश हिन्दी के ऐसे लेखक हैं, जिन्होंने बहुत देशाटन किया है। महात्मा गांधी, पं० नेहरू, आचार्य विनोवा भावे, टाटा और बिरला जो देश की इतनी सेवा कर रहे हैं, उसका कारण उनका देशाटन ही है। वास्तक में देशाटन करना बहुत ही उपयोगी है।



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions