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निबन्ध:दूरसंचार के साधन

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प्रस्तावना–आधुनिक युग में विज्ञान के नवीन आविष्कारों ने विश्व में क्रान्ति सी ला दी है। वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से एक छोर पर मौजूद व्यक्ति दुनिया के दूसरे छोर से बातें करने में सक्षम है। दूरसंचार के क्षेत्र में कम्प्यूटर नेटवर्क के माध्यम से देश के ही नहीं, बल्कि विश्व के भी लगभग सभी मुख्य नगर एक-दूसरे से जुड़ चुके हैं। दूरसंचार से लोगों को देश की हर गतिविधि सामाजिक, राजनीति, आर्थिक एवं सांस्कृतिक की जानकारी मिलती है। हर परिस्थितियों में सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों से जनसाधारण को अवगत कराने की जिम्मेदारी भी दूरसंचार को ही वहन करनी पड़ती है।।

दूरसंचार के साधन-दूरसंचार के साधनों के माध्यम से ही जनता की समस्याओं एवं सूचनाओं को ” जन-जन तक पहुँचाया जाता है। टेलीफोन, रेडियो, टेलीविजन, इत्यादि दूरसंचार के ऐसे ही साधन हैं। टेलीफोन ऐसा माध्यम है, जिसकी सहायता से एक बार में कुछ ही व्यक्तियों से संचार किया जा सकता है, किन्तु दूरसंचार के कुछ साधने ऐसे भी हैं, जिनकी सहायता से एक साथ कई व्यक्तियों से संचार किया जा सकता है। जिन साधनों का प्रयोग कर एक बड़ी जनसंख्या तक विचारों, भावनाओं व सूचनाओं को सम्प्रेषित किया जाता है, उन्हें हम जनसंचार माध्यम भी कहते हैं।

जनसंचार माध्यमों को कुल तीन वर्गों-मुद्रण माध्यम, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम एवं नव-इलेक्ट्रॉनिक माध्यम; में विभजित किया जा सकता है। मुद्रण माध्यम के अन्तर्गत समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ, पैम्फलेट, पोस्टर, जर्नल, पुस्तकें इत्यादि आती हैं। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के अन्तर्गत रेडियो, टेलीविजन एवं फिल्म आती हैं और इन्टरनेट नव-इलेक्ट्रॉनिक माध्यम है। आइए इनके प्रमुख साधनों के बारे में जानते हैं।

रेडियो-आधुनिक काल में रेडियो दूरसंचार का एक प्रमुख साधन है, खासकर दूरदराज के उन क्षेत्रों में जहाँ अभी तक बिजली नहीं पहुंच पाई है या जिन क्षेत्रों के लोग आर्थिक रूप से पिछड़े हैं। भारत में सन् 1923 में रेडियो के प्रसारण के प्रारम्भिक प्रयास और  1927 ई० में प्रायोगिक तौर पर इसकी शुरुआत के बाद से अब तक इस क्षेत्र में अत्यधिक प्रगति हासिल की जा चुकी है और इसका सर्वोत्तम उदाहरण एफ.एम. रेडियो प्रसारण है। एफ.एम. फ्रीक्वेंसी मॉड्यूल का संक्षिप्त रूप है। यह एक ऐसा रेडियो प्रसारण है जिसमें आवृत्ति को प्रसारण ध्वनि के अनुसार मॉड्यूल किया जाता है।

टेलीविजन-टेलीविजन का आविष्कार सन् 1925 में जे०एल० बेयर्ड ने किया था। आजकल यह दूरसंचार का प्रमुख साधन बन चुका है। पहले इस पर प्रसारित धारावाहिकों एवं सिनेमा के कारण यह लोकप्रिय था। बाद में कई न्यूज चैनलों की स्थापना के साथ ही यह दूरसंचार का एक ऐसा सशक्त माध्यम बन गया, जिसकी पहुँच करोड़ों लोगों तक हो गई। भारत में इसकी शुरूआत सन् 1959 में हुई थी। वर्तमान में तीन सौ से अधिक टेलीविजन चैनल चौबीसों घण्टे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम प्रसारित कर दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं।

कम्प्यूटर एवं इन्टरनेट–इन्टरनेट दूरसंचार का एक नवीन इलेक्ट्रॉनिक माध्यम है। इसका आविष्कार 1969 में हुआ था। इसके बाद से अब तक इसमें काफी विकास हो चुका है। इन्टरनेट वह जिन्न है। जो व्यक्ति के सभी आदेशों का पालन करने को तैयार रहता है। विदेश जाने के लिए हवाई जहाज का टिकट बुक कराना हो, किसी पर्यटन स्थल पर स्थित होटल का कोई कमरा बुक कराना हो, किसी किताब का ऑर्डर देना हो, अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए विज्ञापन देना हो, अपने मित्रों से ऑनलाइन चैटिंग करनी हो, डॉक्टरों से स्वास्थ्य सम्बन्धी सलाह लेनी हो या वकीलों से कानूनी सलाह लेनी हो; इन्टरनेट हर मर्ज की दवा है। इन्टरनेट ने सरकार, व्यापार और शिक्षा को नए अवसर दिए हैं। सरकार अपने प्रशासनिक कार्यों के संचालन, विभिन्न कर प्रणाली, प्रबन्धन और सूचनाओं के प्रसारण जैसे अनेकानेक कार्यों के लिए इन्टरनेट का उपयोग करती हैं। कुछ वर्ष पहले तक इन्टरनेट व्यापार और वाणिज्य में प्रभावी नहीं था, लेकिन आज सभी तरह के विपणन और व्यापारिक लेन-देन इसके माध्यम से सम्भव हैं।

दूरसंचार का कार्यक्षेत्र
प्राचीनकाल में सन्देशों के आदान-प्रदान में बहुत समय लग जाया करता था, परन्तु अब समय की दूरी घट गई है। अब टेलीफोन, मोबाइल फोन, टेलीग्राम, प्रेजर, तथा फैक्स के द्वारा क्षणभर में सन्देश और विचारों का आदान-प्रदान किया जा सकता है। अब तक समाचार को टेलीप्रिंटर, रेडियो, अथवा टेलीविजन द्वारा कुछ ही क्षणों में विश्वभर में प्रेषित किया जा सकता है।

उपसंहार-दूरसंचार के माध्यम से हर क्षेत्र सुगम हो चुका है। इसके द्वारा अपने विचारों को कुछ ही क्षणों में  विश्वभर में कहीं भी प्रेषित कर सकते हैं। आज इसे वैज्ञानिक तकनीक ने और भी सुगम और आसान बना दिया है। दूरसंचार या मीडिया के माध्यमों के द्वारा ताजातरीन खबरें और मौसम सम्बन्धी जानकारियाँ हमें आसानी से प्राप्त हो रही हैं।



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