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निबन्ध:का बरखा जब कृषी सुखाने |
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Answer» प्रस्तावना—समय सबसे बड़ा धन है। जिसने समय के प्रवाह को जाना, समय की चाल को पहचाना; वह लघु से महान् और रंक से राजा बन गया। जो समय के मूल्य को नहीं पहचानता, वह समय के बीत जाने पर पछताता है। जो समय पर जागा नहीं, निद्रा-तन्द्रा-आलस्यवश पड़ा रहा, निश्चय ही उसका भाग्य भी सोया रहा। समय पर न किया जाने वाला कार्य उसी प्रकार व्यर्थ है, जिस प्रकार दीपक बुझ जाने पर तेल डालना अथवा चोर के भाग जाने पर सावधान होना। प्रकृति के समस्त कार्य समय पर संचालित होते हैं। सूर्य और चन्द्रमा निश्चित समय पर उदय और अस्त होते हैं तथा ऋतुओं को आगमन निश्चित समय पर होता है, परन्तु मानव ही ऐसा प्राणी है, जो समय के मूल्य को नहीं पहचानता और समय के बीत जाने पर पछताता है। कहा गया है– समय चूकि पुनि का पछताने। का बरखा जब कृषी सुखाने । समय का महत्त्व-मानव-जीवन में समय का महत्त्वपूर्ण स्थान है। कई क्षण मिलकर जीवन का रूप लेते हैं। एक क्षण को नष्ट करने का अर्थ है, जीवन के एक अंश को नष्ट करना। जीवन में समय बहुत थोड़ा है। यदि इसका उपयोग न किया गया तो जीवन व्यर्थ ही चला जाएगा। समय के सदुपयोग से ही जीवन सार्थक बनता है। समय के एक क्षण को संसार के समस्त ऐश्वर्य से भी क्रय नहीं किया जा सकता आयुषः क्षण एकोऽपि, न लभ्यः स्वर्णकोटिकैः। समय का सदुपयोग-समय के सदुपयोग का अर्थ है–निर्धारित समय पर नियमपूर्वक काम करना। जो लोग समय का सदुपयोग करते हैं, वे जीवन में सफल होते हैं। नियत समय काम करने से कठिन-से-कठिन काम भी सरल हो जाते हैं तथा ठीक समय पर कार्य न करने से सुगम कार्य भी कठिन हो जाते हैं। जो लोग आज का काम कल पर छोड़ते हैं, वे आलसी हैं। ऐसे ही लोगों के लिए एक विद्वान् ने कहा है-‘Yesterday never comes’, अर्थात् बीता हुआ कल कभी वापस नहीं आता।। प्रत्येक कार्य की महत्ता के अनुसार उसका समय निर्धारित करना चाहिए। एक क्षण भी व्यर्थ की बातों के लिए नहीं छोड़ना चाहिए; क्योंकि “An empty mind, is devil’s workshop.” यदि हम अच्छे कार्यों में समय लगाते हैं तो हम उसका सदुपयोग करते हैं। यद्यपि समय के सदुपयोग की कोई निर्णायक रेखा नहीं होती, तथापि सामान्य रूप से उचित समय पर काम करने को समय का सदुपयोग कहा जाता है। समय के सदुपयोग से लाभ-समय का सदुपयोग करने के अनेकानेक लाभ हैं। जो विद्यार्थी समय को सदुपयोग कर लेते हैं, वे परीक्षा में प्रथम आते हैं। समय के सदुपयोग से दरिद्र धनवान् बन जाते हैं। यदि हम किसी महापुरुष के जीवन को देखें तो हमें ज्ञात होगा कि वे समय के सदुपयोग से ही महान् बने हैं। मनुष्य समय के सदुपयोग से अपनी शारीरिक, मानसिक और आत्मिक; अर्थात् सर्वांगीण उन्नति कर सकता है। समय के सदुपयोग से आत्मविश्वास की भावना जाग्रत होती है। समय के दुरुपयोग से हानि–समय को व्यर्थ खोकर कोई भी सुखी नहीं हो सका। जिन्होंने समय को नष्ट किया, समय ने उन्हें नष्ट कर दिया। अपनी सेना के कुछ मिनट देर से पहुँचने के कारण नेपोलियन बोनापार्ट को नेल्सन से पराजित होना पड़ा था। समय का दुरुपयोग करने वाला जीवन में आस्था और आत्मविश्वास खो बैठता है। वह अकर्मण्य व असफलता से पीड़ित होकर जीवन से निराश हो जाता है। समय के सदुपयोग के उदाहरण—इतिहास इस बात का साक्षी है कि जो व्यक्ति समय का ध्यान रखता है, समय उसका ध्यान रखता है। समय की उपेक्षा करने वाला समय से भी उपेक्षित रहता है। संसार में जितने भी महापुरुष हुए, सभी ने समय के महत्त्व को समझा और उसका पूर्ण उपयोग किया। महावीर स्वामी ने अपने शिष्य से कहा था-“हे गौतम! क्षण का भी प्रमोद मत कर। जो रात्रियाँ जा रही हैं, वे वापस लौटने वाली नहीं हैं; अत: शुभ संकल्पपूर्वक उनका उपयोग आत्म-साधना के लिए कर।’ समय के दुरुपयोग की समस्या-समय को व्यर्थ खोने वालों में भारतीयों की तुलना नहीं। कार्यालयों में सभी कर्मचारी पास-पास कुर्सियाँ डालकर गप्पों में समय बिता देते हैं। यहाँ पर हिन्दुस्तानी समय के अनुसार काम होता है; अर्थात् निर्धारित समय से दो, तीन, चार घण्टे बाद तक। देश के उच्चकोटि के नेता किसी सभा में समय पर नहीं पहुँचते। भारत में समय के इस अपव्यय से समय का सदुपयोग करने वालों को बड़ी परेशानी होती है। समय को गंवाना हमारे चरित्र का अंग बन गया है। इस दोष को दूर किये बिना राष्ट्र की उन्नति सम्भव ही नहीं है। उपसंहार-समय बड़ा अमूल्य है। जो समय का सदुपयोग करता है, वह अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है तथा जो समय का दुरुपयोग करता है, वह अपने जीवन को नष्ट करता है। माता-पिता, अभिभावक, अध्यापक तथा नेताओं का परम कर्तव्य है कि वे छात्रों को समय के सदुपयोग की प्रेरणा प्रदान करें; क्योंकि राष्ट्र के सम्यक् उत्थान के लिए समय का सदुपयोग नितान्त आवश्यक है। समय का सदुपयोग करके ही अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को सुरक्षित और प्रगतिशील बनाये रखा जा सकता है। कबीर ने समय की गति को समझा था, इसलिए उन्होंने जीवन की सफलता का राज बताते हुए कहा था काल्हि करै सो आज कर, आज करै सो अब। |
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