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निबन्ध:कम्प्यूटर : आधुनिक यन्त्र मानव |
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Answer» प्रस्तावना : कम्प्यूटर क्या है ?–कम्प्यूटर असीमित क्षमताओं वाली वर्तमान युग का क्रान्तिकारी साधन है। यह एक ऐसा यन्त्र-पुरुष है, जिसमें यान्त्रिक मस्तिष्कों का रूपात्मक और समन्वयात्मक योग तथा गुणात्मक घनत्व पाया जाता है। इसके परिणामस्वरूप यह कम-से-कम समय में तीव्र गति से त्रुटिहीन गणनाएँ कर लेता है। आरम्भ में, गणित की जटिल गणनाएँ करने के लिए ही कम्प्यूटर का विकास किया गया था। आधुनिक कम्प्यूटर के प्रथम सिद्धान्तकार चार्ल्स बैबेज़ (1779-1871 ई०) ने गणित और खगोल-विज्ञान की सूक्ष्म सारणियाँ तैयार करने के लिए ही एक भव्य कम्प्यूटर की योजना तैयार की थी। दूसरे महायुद्ध के दौरान पहली बार बिजली से चलने वाले कम्प्यूटर बने। इनका उपयोग भी गणनाओं के लिए ही हुआ। आज के कम्प्यूटर केवल गणनाएँ करने तक ही सीमित नहीं रह गये हैं वरन् अक्षरों, शब्दों, आकृतियों और कथनों को भी ग्रहण करने अथवा इससे भी अधिक अनेकानेक कार्य करने में समर्थ हैं। कम्प्यूटर के उपयोग-आज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कम्प्यूटरों का व्यापक उपयोग हो रहा है (क) प्रकाशन के क्षेत्र में सन् 1971 ई० में माइक्रोप्रॉसेसर का आविष्कार हुआ। इस • आविष्कार ने कम्प्यूटरों को छोटा, सस्ता और कई गुना शक्तिशाली बना दिया। माइक्रोप्रॉसेसर के आविष्कार के बाद कम्प्यूटर का अनेक कार्यों में उपयोग सम्भव हुआ। किसी पुस्तक की 500 पृष्ठों की पाण्डुलिपि का कुछ हजार पुस्तकों के रूप में पाठकों के सम्मुख आना कुछ घण्टों की बात हो गयी है। (ख) बैंकों में कम्प्यूटर का उपयोग बैंकों में भी किया जाने लगा है। खातों के संचालन और लेनदेन का हिसाब रखने वाले कम्प्यूटर भी बैंकों में स्थापित हो रहे हैं। आज कम्प्यूटर के द्वारा ही 24 घण्टे पैसों के लेन-देन की ए० टी० एम० (Automated Teller Machine) जैसी सेवाएँ सम्भव हो सकी हैं।। (ग) सूचनाओं के आदान-प्रदान में प्रारम्भ में कम्प्यूटर की गतिविधियाँ वातानुकूलित कक्षों तक ही सीमित थीं, किन्तु अब एक कम्प्यूटर हजारों किलोमीटर दूर के दूसरे कम्प्यूटरों के साथ बातचीत कर सकता है तथा उन्हें सूचनाएँ भेज सकता है। इण्टरनेट जैसी सुविधा से आज देश का प्रत्येक नगर सम्पूर्ण विश्व से जुड़ गया है। (घ) आरक्षण के क्षेत्र में–कम्प्यूटर नेटवर्क की अनेक व्यवस्थाएँ अब हमारे देश में स्थापित हो गयी हैं। इसके द्वारा अब सभी प्रमुख एयरलाइन्स की हवाई यात्राओं तथा देश के सभी प्रमुख शहरों में रेल-यात्रा के आरक्षण की व्यवस्था भी अस्तित्व में आ गयी है। (ङ) कम्प्यूटर ग्राफिक्स में कम्प्यूटर केवल अंकों और अक्षरों को ही नहीं, वरन् रेखाओं और आकृतियों को भी सँभाल सकते हैं। कम्प्यूटर ग्राफिक्स की इस व्यवस्था के अनेक उपयोग हैं। भवनों, मोटरगाड़ियों तथा हवाईजहाजों आदि के डिजाइन तैयार करने में कम्प्यूटर ग्राफिक्स का व्यापक उपयोग हो रहा है। वास्तुशिल्पी भी अब अपने डिजाइन कम्प्यूटर स्क्रीन पर तैयार करते हैं। (च) कला के क्षेत्र में कम्प्यूटर अब चित्रकार की भूमिका भी निभाने लगे हैं। चित्र तैयार करने के लिए अब रंगों, तूलिकाओं, रंग-पट्टिका और कैनवास की कोई आवश्यकता नहीं रह गयी है। चित्रकार अब कम्प्यूटर के सामने बैठता है और अपने नियोजित प्रोग्राम की मदद से अपनी इच्छा के अनुसार स्क्रीन पर रंगीन रेखाएँ प्रस्तुत कर देता है। (छ) संगीत के क्षेत्र में कम्प्यूटर अब सुर सजाने का काम भी करने लगे हैं। पाश्चात्य संगीत के स्वरांकन को कम्प्यूटर स्क्रीन पर प्रस्तुत करने में कोई कठिनाई नहीं होती, परन्तु वीणा जैसे भारतीय वाद्य की स्वरलिपि तैयार करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। लेकिन वह दिन दूर नहीं, जब भारतीय संगीत की स्वर-लहरियों को भी कम्प्यूटर स्क्रीन पर उभर कर प्रस्तुत किया जा सकेगा। (ज) खगोल-विज्ञान के क्षेत्र में कम्प्यूटरों ने वैज्ञानिक अनुसन्धान के अनेक क्षेत्रों का समूचा ढाँचा ही बदल दिया है। पहले खगोलविद् दूरबीनों पर रात-रात भर आँखें गड़ाकर आकाशीय पिण्डों का अवलोकन करते रहते थे, किन्तु अब किरणों की मात्रा के अनुसार ठीक-ठीक चित्र उतारने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध हो गये हैं। (झ) चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन भी एक सरल कम्प्यूटर ही है। मतदान के लिए ऐसी वोटिंग मशीनों का उपयोग अब हमारे देश में भी हो रहा है। (ञ) उद्योग-धन्धों में कम्प्यूटर उद्योग-नियन्त्रण के भी शक्तिशाली साधन हैं। बड़े-बड़े कारखानों के संचालन का काम अब कम्प्यूटर सँभालने लगे हैं। कम्प्यूटरों से जुड़कर रोबोट अनेक किस्म के औद्योगिक उत्पादनों को सँभाल सकते हैं। (ट) सैनिक कार्यों में आज भी प्रमुख रूप से महायुद्ध की तैयारी के लिए नये-नये शक्तिशाली सुपर कम्प्यूटरों का विकास किया जा रहा है। महाशक्तियों की ‘स्टारवार्स’ की योजना कम्प्यूटरों के नियन्त्रण पर आधारित है। (ठ) अपराध निवारण में अपराधों के निवारण में भी कम्प्यूटर की अत्यधिक उपयोगिता है। कई देशों में सभी अधिकृत वाहन मालिकों, चालकों, अपराधियों का रिकॉर्ड पुलिस के एक विशाल कम्प्यूटर में संरक्षित होता है। कम्प्यूटर द्वारा क्षणमात्र में अपेक्षित जानकारी उपलब्ध हो जाती है, जो कि अपराधियों को पकड़ने में सहायक सिद्ध होती है। किसी अपराधी का कैसा भी चित्र उपलब्ध होने पर कम्प्यूटर की सहायता से अपराधी के किसी भी उम्र और स्वरूप की तस्वीर प्रस्तुत की जा सकती है। कम्प्यूटर तकनीक से हानियाँ-जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कम्प्यूटर तकनीक के निरन्तर बढ़ते जा रहे व्यापक उपयोगों ने जहाँ एक ओर इसकी उपयोगिता दर्शायी है, वहीं दूसरी ओर इसके भयावह परिणामों को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि कम्प्यूटर हर क्षेत्र में मानव-श्रम को नगण्य बना रहा है, जिससे भारत सदृश जनसंख्या बहुल देशों में बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। बैंकों आदि में इस व्यवस्था के कुछ दुष्परिणाम भी सामने आये हैं। दूसरों के खातों के कोड नम्बर जानकर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपयों से बैंकों को ठगना अब एक आम बात हो गयी है। कम्प्यूटर और मानव-मस्तिष्क-कम्प्यूटर के सन्दर्भ में ढेर सारी भ्रान्तियाँ जनसामान्य के मस्तिष्क में छायी हुई हैं। कुछ लोग इसे सुपर पावर समझ बैठे हैं, जिसमें सब कुछ करने की क्षमता है; किन्तु उनकी धारणाएँ पूर्णरूपेण निराधार हैं। वास्तविकता तो यह है कि कम्प्यूटर एकत्रित आँकड़ों को इलेक्ट्रॉनिक विश्लेषण प्रस्तुत करने वाली एक मशीन-मात्र है। यह केवल वही काम कर सकता है जिसके लिए इसे निर्देशित किया गया हो। यह कोई निर्णय स्वयं नहीं ले सकता और न ही कोई नवीन बात सोच सकता है। यह मानवीय संवेदनाओं, अभिरुचियों, भावनाओं और चित्त से रहित, मात्र एक यन्त्र-पुरुष है। जिसकी बुद्धि-लब्धि (Intelligence Quotient : I.O.) मात्र एक मक्खी के बराबर होती है, यानि बुद्धिमत्ता में कम्प्यूटर मनुष्य से कई हजार गुना पीछे है। उपसंहार-निष्कर्ष रूप में यह कहा जा सकता है कि कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी के भी दो पक्ष हैं। इसको सोच-समझकर उपयोग किया जाए तो यह वरदान सिद्ध हो सकता है, अन्यथा यह मानव-जाति की तबाही का साधन भी बन सकता है। इसलिए कम्प्यूटर की क्षमताओं को ठीक से समझना आवश्यक है। इलेक्ट्रॉनिकी शिक्षा एवं साधन; कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी की उपेक्षा नहीं कर सकते। लेकिन इनके लिए यदि बुनियादी शिक्षा की समुचित व्यवस्था की जाती, देश में टेक्नोलॉजी के साधन जुटाये जाते और पाश्चात्य संस्कृति में विकसित हुई इस टेक्नोलॉजी को देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर धीरे-धीरे अपनाया जाता तो अच्छा होता। |
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