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निबंध लेखन :अगर मैं पंछी होता, तो …..

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प्रस्तावना :
ईश्वर की बनायी इस अद्वितीय सृष्टि में पंछी भी एक उत्तम प्राणी है। पंछी को ही हम पक्षी, विहंग कहते हैं। पंछी परमात्मा का प्रतीक है। पंछी आत्मा का स्वरूप भी माना जाता है। उपनिषदों में आत्मा और परमात्मा दोनों को भी पक्षी के स्वरूप माना गया।

विषय विश्लेषण :
पंछी (पक्षी) स्वेच्छा से उड़नेवाला निर्बाध प्राणी है। आत्मनिर्भरता का यह सच्चा प्रतीक है। यह सदा उपकारी ही रहा है। प्रकृति में अनेक प्रकार के पंछी पाये जाते हैं। हर पंछी अपना विशेष महत्व रखता है। चाहे कितना भी कष्ट या नष्ट का सामना करना पडे वह कभी विचलित नहीं होता। धैर्य के साथ जीवन यापन करता रहता है। सदा संतुष्ट रहनेवाला आदर्श प्राणी है।

महत्व :
आत्मनिर्भर पंछी का जीवन मेरे लिए आदर्शमय है। अगर मैं पंछी होता तो उसी की तरह अपना एक मकान (घोंसला) खुद बना लेता और परिवार की रक्षा करते जी जान लगाकर पालन – पोषण करता। परिवार के सदस्यों से प्रेमपूर्ण व्यवहार करते उनमें उत्तम गुणों को पनपने का सफल प्रयत्न करता। किसी अत्याचारी या दुराचारी को मैं अपने या अपने परिवारवालों की ओर ताकने नहीं देता। मानव समाज की तरह धान्य, संपत्ति आदि छिपाने की ज़रूरत नहीं होती। झूठ बोलने की, स्वार्थ से किसी को धोखा देने की, हानि करने की बात ही न उठती। अपने और अपने परिवार के सदस्यों के पेट भरने दूर – दूर प्रांतों में जाकर दाना – दान ले आता। सदा सब की सहायता करने में तन मन लगा देता। ऐसा करके अपना जीवन सार्थक बना लेता।

उपसंहार :
अगर मैं पंछी होता तो मेरे परिवार को रक्षा करूँगा। फंसल उगाने में किसनों को मदद करूँगा।



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