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Answer» प्रस्तावना : भारत हमारा एक विशाल और महान देश है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं। ऐसी हालत में जन साधारण को आपस में कार्य करने और एक दूसरे को समझने एक शक्तिशाली भाषा की आवश्यकता है। देश । के अधिकांश लोगों से बोली जानेवाली और समृद्ध साहित्यवाली आसान भाषा ही राष्ट्र भाषा बन सकती है। हिन्दी में ये सभी गुण विद्यमान हैं। ख़ासकर हिन्दी साहित्य का करीब एक हज़ार वर्ष का इतिहास है। सूरदास, तुलसी, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, महावीर प्रसाद द्विवेदी आदि महान साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से हिन्दी को समृद्ध किया है। महत्व : स्वतंत्र भारत की राष्ट्र भाषा बनने का सौभाग्य हिन्दी को मिला है। यह जनता की सेविका है। सारी जनता को एक सूत्र में बांधने की शक्ति रखती है। सन् 14 सितंबर 1949 हिन्दी को राष्ट्रभाषा का पद दिया गया हैं। तब से हिन्दी प्रचार के विषय में केंद्रीय और प्रांतीय सरकार दोनों अधिक कार्यरत हैं। हिन्दी एक सजीव भाषा है। इस पर अन्य कई भाषाओं का गहरा प्रभाव है। खासकर स्वतंत्रता संग्राम के वक्त समूल भारत जाति को एकत्रित करने में हिन्दी का सशक्त योगदान प्रशंसनीय रहा । भारत में हर साल सितंबर 14 को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। विद्यालयों में हिन्दी दिवस के सिलसिले में गीत, नाटक, निबंध आदि भाषा संबंधी प्रतियोगिताएँ संपन्न की जाती हैं। प्रतियोगिताओं में प्रतिभा दिखानेवाले छात्रों को पुरस्कार दिये जाते हैं। खासकर हिन्दी भाषा की मधुरता का आनंद लेते हैं। हम प्रण करते हैं कि शक्ति भर राष्ट्र भाषा के प्रचार व प्रसार में अपना हाथ बँटाएँगे। उपसंहार : सभी भारतीय भाषाओं में हिन्दी का महत्व अधिक है। ऐसी महान भाषा की उन्नति और प्रचार में सबको अपना कर्तव्य निभाना चाहिए।
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