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निबंध लेखन : मध्यपान निषेध

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प्रस्तावना :
मनुष्य सामाजिक प्राणी है। इस संसार में उसे अनेक कष्टों का सामना करना पडता है। दुःख भी भोगना पडता है। उन्हें भूलने के लिए अनेक उपाय करता है। मनोरंजन के साधन भी इसी उद्देश्य से बने हुए हैं। मद्य या नशे का सेवन भी इसी उद्देश्य से किया जाता है। नशे के सेवन से वह सामान्य स्थिति को कुछ समय तक भूल जाता है। उसे कुछ समय तक एक प्रकार की शांति का अनुभव होता है। लेकिन यह बुरी आदत है। इसकी आदत होने पर अधिक से अधिक सेवन करता रहता है। इसलिए तबीयत खराब होकर जीवन को नष्ट कर लेता है। सामाजिक दृष्टि से यह हानिकारक माना जाता है।

विषय विश्लेषण :
संसार में मद्यपान संबंधी अनेक चीजें हैं। उनके उपयोग से मनुष्य नाश हो जाता है। शराब, भंग, अफीम, तंबाकू आदि बुहत सी वस्तुएँ विनाशकारक हैं। इनके व्यापार से बडा लाभ होता है और सरकार का कोश भी भर जाता है। इस आदत के वशीभूत होने पर उसे छोडना असंभव होता है।

उपसंहार :
मद्यपान की आदत से जुआ और वेश्यागमन में बन्दी होकर जीवन को दुःखमय कर ले रहे हैं। अतः सरकार का कर्तव्य है कि मद्यपान निषेध में काठिन्यता दिखाकर निषेध करने की अत्यंत आवश्यकता है। इससे गरीब लोगों की बडी सहायता होती है। उनका जीवन सुखमय बन सकता है।



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