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निबंध लेखन : पाठशाला में खेलों का महत्व |
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Answer» विद्या का उद्देश्य बालक का सर्वतोमुखी विकास करना है। याने शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक | पाठ्य पुस्तकों के द्वारा विद्यार्थी का मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नति होती है। मगर शारीरिक रूप से उसे मज़बूत बनाने के लिए व्यायाम की ज़रूरत है। व्यायाम का दूसरा रूप ही खेल है। इसलिए पाठशाला में खोलों का आयोजन किया गया है। खेल सिखाने के लिए विशेष अध्यापकों को नियुक्त भी किया गया है। कबड्डी, खो-खो, वालीबॉल, हॉकी, टेनिस, टेन्नीकाइट, बैडमेंटन आदि तरह-तरह के खेल खेलाये जाते हैं। इससे विद्यार्थी मज़बूत बनते हैं। उत्साह बढ़ता है। खून साफ़ होता है। पढ़ाई में मन लगा सकता है। अगर विद्यार्थी बलहीन और बीमारग्रस्त होता है, तो वह पढ़ाई में मन लगा नहीं सकता है। वह पढ़ाई में सब बच्चों से पीछे पड़ जाता है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है। इस उक्ति को दृष्टि में रखकर ही पाठशाला में खेलों के लिए स्थान दिया गया है। खेलों का बड़ा महत्व है। खेलों से छात्रों में होड का भाव बढ़ता है। हर विषय में प्रथम रहने का भाव बढ़ जाता है। |
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