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निबंध लेखन :प्रिय नेता

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प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी विश्व की महानतम महिला थीं। इनका जन्म इलाहाबाद आनन्द भवन में 19 नवंबर सन् 1917 में हुआ था। उस समय इनके पिता पं. जवाहरलाल नेहरू महात्मा गाँधी के साथ देश के स्वतंत्रता संग्राम में संलग्न थे। आनंद भवन उन दिनों स्वतंत्रता सेनानियों का गढ़ बना हुआ था।

इन्दिरा जब नन्हीं सी थी तो देश के महान नेताओं की गोद में खेलने का अवसर उसे मिला। जब यह नन्हीं बालिका केवल चार वर्ष की थी तभी मेज़ पर खडे होकर अंग्रेजों के खिलाफ़ भाषण दी थी। जिसे भारत के बड़े -बड़े नेता सुन और हँसकर उस पर स्नेह की वर्षा बरसाई । इंदिरा का जन्म जब आनंद भवन में हुआ तो भारत कोकिल सरोजिनी नायुडू ने पं. जवहारलाल को एक बधाई संदेश भेजकर कहा था – “कमला की कोख से भारत की नयी आत्मा उत्पन्न हुई है।”

महात्मा गाँधी तथा देश के बड़े – बड़े नेताओं के सम्पर्क में आने से इंदिरा की राजनीति में गहरी पैठ होने लगी थी। स्वतंत्रता के समय इलाहाबाद में बच्चों की एक स्वयं सेवी संस्था बनी थी जिसका नाम वानर सेना रखा गया था। इस सेना के लगभग साठ हज़ार सदस्य थे। इंदिरा जब सात वर्ष की थी तभी वानर सेना की सदस्य बनी और बारह वर्ष की आयु में उसकी नेता चुनी गयी।

वानर सेना ने अंग्रेज़ सरकार की नाक में दम कर रखा था। इस सेना का काम जुलूस निकालना, इन्कलाब के नारे लगाना, काँग्रेस के नेताओं के संदेश जनता तक पहुँचाना और पोस्टर चिपकाना होता था।

स्वतंत्रता आंदोलन में नेहरू परिवार व्यस्त रहने के कारण इंदिरा की प्रारम्भिक शिक्षा की व्यवस्था घर पर ही होती रही। बाद में उन्हें स्विटजरलैंड तथा भारत में शान्तिनिकेतन में शिक्षा पाने का अवसर मिला। इंदिरा को आक्सफोर्ड युनिवर्सिटी में भी प्रवेश मिला था। किन्तु अस्वस्थता एवं दूसरा महायुद्ध शुरू हो जाने के कारण वहाँ की शिक्षा पूरी न हो सकी।

सन् 1942 में इंदिरा गाँधी का विवाह फिरोज़ गाँधी से हुआ। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और तेरह मास जेल की सज़ा हुई।

सन् 1947 में भारत स्वतंत्र हुआ और काँग्रेस की सरकार बनी। पं. जवाहरलाल नेहरू प्रथम प्रधानमंत्री बने। सन् 1955 में आप काँग्रेस कार्यसमिति की सदस्य बनी और सन् 1959 में काँग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयी। 14 जनवरी 1966 को इंदिरा गाँधी ने भारत के प्रधानमंत्री का पद भार सँभाला। उसके बाद उन्होंने राष्ट्र की प्रगति के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये। जैसे – बैंकों का राष्ट्रीयकरण, रूस से संधि, पाकिस्तान से युद्ध, राजाओं के प्रिवीपर्स की समाप्ति, बीस सूत्री कार्यक्रम आदि। भारत की प्रगति के लिए इंदिरा गाँधी ने रात – दिन कार्य किया।

भारत को प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से भारी आशाएँ थीं। परन्तु 31 अक्तूबर 1984 को प्रातः 9 बजकर 15 मिनट पर इनके ही दो सुरक्षाकर्मचारियों ने इनको गोलियों से छलनी कर दिया। उस दिन विश्वशांति और भारत की प्रगति के लिए सर्वस्व निछावर करनेवाली प्रधानमंत्री इदिरा गाँधी के निधन पर सारा संसार शोकमग्न हो गया।



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