1.

निबंध लेखन :पर्यावरण और प्रदूषण …

Answer»

प्रस्तावना :
पर्यावरण का अर्थ है वातावरण। पर्यावरण हर प्राणी का रक्षाकवच है। पर्यावरण के संतुलन से . मानव का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। विश्व भर की प्राणियों के जीवन पर्यावरण की स्थिति पर निर्भर रहते हैं। आजकल ऐसा महत्वपूर्ण पर्यावरण बिगडता जा रहा है। पर्यावरण में भूमि, वायु, जल, ध्वनि नामक चार प्रकार । के प्रदूषण फैल रहे हैं। इन प्रदूषणों के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगडता जा रहा है।

विषय विश्लेषण :
भूमि पर रहनेवाली हर प्राणी को जीने प्राणवायु (आक्सिजन) की आवश्यकता होती है। यह प्राणवायु हमें पेड – पौधों के हरे – भरे पत्तों से ही मिलता है। इन दिनों पेड – पौधों को बेफ़िक्र काट रहे हैं। वास्तव में पेड – पौधे ही पर्यावरण को संतुलन रखने में काम आते हैं। ऐसे पेड – पौधों को काटने से पर्यावरण का संतुलन तेज़ी से बिगडता जा रहा है । हमारे चारों ओर के कल – कारखानों से धुआँ निकलता है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। कूडे – कचरे को नदी – नालों में बहा देने से जल प्रदूषण हो रहा है। वायु – जल प्रदूषणों के कारण कई बीमारियाँ फैल रही हैं।

नष्ट :
पर्यावरण के असंतुलन से मौसम समय पर नहीं आता। इससे वर्षा भी ठीक समय पर नहीं होती। वर्षा के न होने के कारण अकाल पडता है। कहीं अतिवृष्टि और कहीं अनावृष्टि की हालत भी आती है।

ऐसे प्रदूषण को यथा शक्ति दूर करना हम सबका कर्तव्य है। इसके लिए हम सब यह वचन लें और प्रयत्न करें – गंदगी न फैलाएँ, कूडा – कचरा नदी नालों में न बहायें, उनको सदा साफ़ रखें , पेड़ों को न काटें। साथ ही नये पेड – पौधे लगाकर पृथ्वी की हरियाली बढायें। वाहनों का धुआँ कम करें। ऐसा करने से ही पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions