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निबंध लेखन :पुस्तकें ज्ञान के भंडार हैं

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प्रस्तावना :

पढ़ने के लिए जिस स्थान पर पुस्तकों का संग्रह होता है, उसे पुस्तकालय कहते हैं। भारत में मुम्बई, कलकत्ता , चेन्नै, दिल्ली, हैदाराबाद आदि शहरों में अच्छे पुस्तकालय हैं। तंजाऊर का सरस्वती ग्रंथालय अत्यंत महत्व का है। मानव जीवन में पुस्तकालय का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

विषय विश्लेषण : पुस्तकालय चार प्रकार के हैं।

1.    व्यक्तिगत पुस्तकालय

2.    सार्वजनिक पुस्तकालय

3.    शिक्षा – संस्थाओं के पुस्तकालय

4.    चलते – फिरते पुस्तकालय

पुस्तकों को पढ़ने की रुचि तथा खरीदने की शक्ति रखनेवाले व्यक्तिगत पुस्तकालयों का संचालन करते हैं। इतिहास, पुराण, नाटक, कहानी, उपन्यास, जीवनचरित्र आदि सभी तरह के ग्रंथ सार्वजनिक पुस्तकालयों में मिलते हैं। इनमें सभी लोग अपनी पसंद की पुस्तकें पढ़ सकते हैं। नियत शुल्क देकर सदस्य होने पर पुस्तकें घर ले जा सकते हैं। शिक्षा संस्थाओं के पुस्तकालयों से केवल तत्संबंधी विद्यार्थी ही लाभ पा सकते हैं। देहातों तथा शहरों के विभिन्न प्रांतों के लोगों को पुस्तकें पहुँचाने में चलते – फिरते पुस्तकालय बहुत सहायक हैं। इनके नियमित रूप से पढ़ने से मनोरंजन के साथ – साथ ज्ञान – विज्ञान की भी वृद्धि होती है।

पुस्तकें पढ़ने से ये लाभ हैं :

इनके नियमित रूप से पढ़ने से मनोरंजन के साथ – साथ ज्ञान – विज्ञान की भी वृद्धि होती है।

1.    अशिक्षा दूर होती है।

2.    बुद्धि का विकास होता है।

3.    कुभावनाएँ दूर होती हैं।

विभिन्न देशों की सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक परिस्थितियों का परिचय मिलता है।

उपसंहार :
पुस्तकालय हमारा सच्चा मित्र है। इसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। इसलिए पुस्तकों को गंदा करना, पन्ने फाडना नहीं चाहिए। अच्छी पुस्तकें सच्चे मित्र के समान हमारे जीवन भर काम आती है। ये सच्चे गुरु की तरह ज्ञान और मोक्ष दायक भी हैं।



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