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निबन्ध : मनोरंजन के साधन

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जब मनुष्य काम करते-करते थक जाता है तो उसे मनोरंजन की आवश्यकता होती है। थोड़ी देर मनोरंजन करने से उसका मन प्रसन्न हो जाता है, वह फिर अपने काम में जुट जाता है। विद्यार्थियों से लेकर बड़े अधिकारी तक अपनी थकान दूर करने के लिए मनोरंजन करते हैं। वास्तव में मनोरंजन के साधन मनुष्य को शक्ति देते हैं। थकावट दूर करते हैं और जीवन में स्फूर्ति लाते हैं। अतः मानव जीवन में इनकी बड़ी आवश्यकता है।

मनुष्य अपने मन को बहलाने के लिए अलग-अलग ढंग से मनोरंजन के साधन अपनाता आया है। प्राचीनकाल में चौपड़, बाजीगर के खेल, कठपुतली के खेल, रामलीला, पशुओं की लड़ाई शिकार खेलना आदि मनोरंजन के साधन थे किन्तु आज बहुत कम लोग इनके द्वारा अपना मनोरंजन करते हैं। विज्ञान ने मनुष्य को मनोरंजन के लिए बड़े सस्ते और अच्छे साधन दिए हैं। आधनिक समय में मनोरंजन के प्रमुख साधन निम्नलिखित हैं आधुनिक युग में मनोरंजन का सबसे सस्ता और अच्छा साधन रेडियो है। अपने कार्यों से थका हुआ मनुष्य रेडियो सुनकर अपना मन बहला लेता है। रेडियो पर तरह-तरह के गाने, कहानी तथा नाटक सुनकर आज करोड़ों मनुष्य अपनी मनोरंजन करते हैं। अब तो टेलीविजन पर गाने वाले या बोलने वाले का चित्र भी साथ-साथ दिखाया जाने लगा है। रंगीन टेलीविजन ने इस क्षेत्र में क्रान्ति ला दी है। इससे उत्तम मनोरंजन के साथ-साथ उत्तम शिक्षाप्रद कार्यक्रम भी देखने को मिलते हैं। सिनेमा भी मनोरंजन का प्रमुख साधन हैं। जब से सिनेमा का प्रचार हुआ है तब से सर्कस, थियेटर और नाटक के खेल बहुत कम हो गए हैं। सिनेमा करोड़ों व्यक्तियों का प्रतिदिन मनोरंजन करते हैं। यह भी मनोरंजन का बड़ा सस्ता और अच्छा साधन है।

आज लाखों लोग खेल-कूद द्वारा अपना मनोरंजन करते हैं। विद्यार्थियों के लिए खेल-कूद ही मनोरंजन का सर्वश्रेष्ठ साधन है। हॉकी, फुटबॉल तथा बैडमिंटन खेलना, दौड़ना, कूदना आदि मनोरंजन के उत्तम साधन माने गए हैं। दिन भर के कार्य से थका हुआ मनुष्य इन खेलों से प्रसन्न हो जाता है, वह फिर अपने काम में जुट जाता है। कुछ लोग घर के बाहर जाना अधिक पसन्द नहीं करते हैं। वे घर पर ही रहकर अपना मनोरंजन कर लेते हैं। कोई कहानी और उपन्यास पढ़कर प्रसन्न होता है, तो कोई सितार, बाँसुरी या पियानो बजाकर अपना मन प्रसन्न कर लेता है। कोई मित्रों के साथ बैठकर ताश खेलना पसन्द करता है तो कोई ग्रामोफोन और रेडियो पर गाने सुनता है। जिसकी जैसी रुचि होती है, वह वैसा ही साधन अपना लेता है।
मनोरंजन के साधनों की कोई सीमा नहीं है। जिसका जिससे मन बहल जाए, उसके लिए वही मनोरंजन का साधन है। घूमना, फोटो खींचना, चित्रकारी, नदी की सैर या शतरंज खेलनी, नाव चलाना, कैरम खेलना, समाचार-पत्र पढ़ना, काढ़ना-बुनना, गाना आदि सभी मनोरंजन के साधन हैं।

कभी-कभी लोग नशा करके भी अपना मनोरंजन किया करते हैं किन्तु नशा करना या जुआ खेलना मनोरंजन का उत्तम साधन नहीं है, इनसे तो धन की बर्बादी होती है और स्वास्थ्य भी खराब हो जाता है। अत; जो साधन हानिकारक हैं, उनको कभी भी नहीं अपनाना चाहिए। वास्तव में जो लोग शारीरिक कार्य करते हैं, उनको घरेलू मनोरंजन के साधन अपनाने चाहिए और जो लोग मानसिक कार्य करते हैं, उन्हें भाग-दौड़ साधन अपनाने चाहिए। इसी से मानव का अधिक कल्याण हो सकता है।



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