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निबन्ध : फुटबॉल मैच का वर्णन |
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Answer» शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खेलना भी अत्यन्त आवश्यक है। इस सम्बन्ध में एक कहावत भी प्रसिद्ध है-“स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करती है।” छात्रों को स्वस्थ और बलवान बनाने के लिए ही विद्यालयों में अनेक प्रकार के खेल-खिलाए जाते हैं। इन मैचों से आपस में मिलकर काम करने की भावना तथा खेलों के प्रति रुचि जाग्रत् हो जाती है। हमारे विद्यालय में 11 मई, 2002 को एक फुटबॉल मैच हुआ था। यह मैच हमारे विद्यालय की टीम और राजकीय माध्यमिक विद्यालय की टीम के बीच खेला गया। इस मैच को देखने के लिए सैकड़ों छात्र दूर-दूर से आए थे। मैच चार बजे शुरू होने वाला था। समय से पहले ही हजारों दर्शक मैदान के चारों ओर इकट्ठा हो गए थे। आज तो खेल का मैदान भी बड़ा साफ दिखाई दे रहा था। लगभग चार बजे दोनों दल मैदान में उतर पड़े। दोनों दलों के खिलाड़ियों ने अलग-अलग रंग की कमीजें पहन रखी थीं। दोनों दलों के कप्तानों ने अपने-अपने खिलाड़ियों को ठीक-ठीक स्थान पर खड़ा कर दिया। एक-एक खिलाड़ी गोल के पास भी खड़ा कर दिया गया। ठीक चार बजे रेफरी ने सीटी बजाई और खेल आरम्भ हो गया। पूरे मैदान में दौड़-सी लग गई। जिधर भी गेंद जाती थी, उधर से ही धम-धम की आवाजें आने लगती थीं। गेंद बड़ी तेजी से कभी इधर जाती थी तो कभी उधर जाती थी। दोनों ओर के गोल रक्षक बड़े ही फुर्तीले थे। यदि कोई खिलाड़ी गोल को गोल के पास ले भी जाता था तो गोल रक्षक बड़े कौशल से उसे वापस लौटा देता था। दर्शक ताली बजा-बजाकर खिलाड़ियों को उत्साह बढ़ा रहे थे। सबकी दृष्टि राजकीय माध्यमिक विद्यालय के कप्तान पर जमी हुई थी। उसमें तो बिजली जैसी फुर्ती थी। जब वह गेंद को लेकर आगे बढ़ता था तो दर्शक उछल पड़ते थे। एक बार हमारे विद्यालय का होनहार खिलाड़ी राजेन्द्र सिंह गेंद को लेकर आगे बढ़ा। वह गोल के पास तक जा पहुँचा। दूसरे दल के खिलाड़ियों के तो छक्के छूटे गए किन्तु उसी समय रेफरी ने लम्बी सीटी बजाकर अल्पावकाश की सूचना दी। खेल थोड़ी देर के लिए रोक दिया गया। सभी खिलाड़ियों को जलपान कराया गया। खिलाड़ियों ने खेल के बारे में नई योजनाएँ बनाईं और कोई दस मिनट बाद फिर खेल शुरू हो गया। अबकी बार खिलाड़ी बड़े उत्साह से खेल रहे थे। हमारी टीम के कप्तान ने दूसरे दल के गोल के पास गेंद ले जाकर गोल करना चाही किन्तु गोल रक्षक ने गेंद को रोक दिया। गोल होते-होते बच गया। उसी समय एक खिलाड़ी के पैर की एक ही चोट से गेंद मैदान के दूसरे किनारे पर आ पहुँची और उधर एकदम हलचल सी मच गई। विपक्षी तो अवसर की तलाश में थे ही। एक खिलाड़ी ने ‘चक्र’ में जाकर ऐसा ‘किक’ मारा कि बेचारा गोल रक्षक भी देखता ही रह गया। चारों ओर से ‘गोल-गोल’ की आवाजें आने लगीं। सभी दर्शक प्रसन्नता से उछल पड़े। तुरन्त ही गेंद को फिर बीच में लाया गया और खेल फिर शुरू हो गया। दर्शक चारों ओर से खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ा रहे थे और खेल की प्रशंसा कर रहे थे। हमारे विद्यालय के खिलाड़ी गेंद को उतारने के लिए जी जान से प्रयत्न कर रहे थे किन्तु विपक्षी तो लोहे की दीवार बने हुए थे। फुटबॉल तेजी से नाचने लगी किन्तु गोल न हो सका। ठीक साढे पाँच बजे रेफरी ने सीटी बजाई और मैच समाप्त हो गया। विजयी टीम के खिलाड़ियों को दर्शकों ने गोदी में उठा लिया। दोनों टीमों के खिलाड़ियों को एक-एक टी-शर्ट इनाम में दी गई और विजयी टीम को ‘टी-सेट व मेडल’ प्रदान किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य महोदय ने दोनों ओर के खिलाड़ियों को धन्यवाद दिया और सभी प्रसन्नतापूर्वक अपने-अपने घरों को लौट गए। |
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