| 1. |
निबन्ध : वसन्त ऋतु |
|
Answer» भारतवर्ष में तीन ऋतुएँ प्रमुख हैं-जाड़ा, गर्मी और वर्षा। जहाँ जाड़े में बहुत जाड़ा पड़ता है, गर्मी में बहुत गर्मी पड़ती हैं और वर्षा ऋतु में चारों ओर जल ही जल हो जाता है। इन तीनों ऋतुओं के बीच में वसन्त ऋतु भी आती है, जो चैत्र और बैसाख में मनायी जाती है। यह ऋतु अन्य सब ऋतुओं में श्रेष्ठ होती है। इनमें न अधिक ठण्ड पड़ती है और न अधिक गर्मी। चारों ओर हरियाली ही हरियाली छा जाती है और सुगन्धित वायु सबको प्रसन्न कर देती है। वसन्त में सभी को सुख मिलना है। इसीलिए इसे ऋतुराजे भी कहा जाता है। वसन्त ऋतु में खेतों में चारों ओर हरियाली दिखाई पड़ने लगती है। कहीं दूर तक पीली सरसों के खेत दिखाई देते हैं तो कहीं मटर, गेहूँ और चने के खेत भरे दिखाई देते हैं। वसन्त ऋतु में गुलाब, गेंदा, गुलमेंहदी आदि सैकड़ों प्रकार के फूल खिल उठते हैं और अपनी सुगन्ध से हवा को भी सुगन्धित कर देते हैं। वसन्त पंचमी और होली इस ऋतु के प्रमुख उत्सव हैं। वसन्त पंचमी को लोग पीले वस्त्र पहनते हैं। और हँसी-खुशी से हवन करते हैं। होली तो मस्ती और प्रसन्नता का त्योहार है। इस ऋतु में स्थान-स्थान पर फाग के गीत गाए जाते हैं। प्राचीन काल में तो राजा लोग अपने राज्य का भ्रमण करने के लिए इसी ऋतु में यात्राएँ किया करते थे। वसन्त ऋतु का स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इस ऋतु में प्रात:काल का टहलना तो बहुत ही लाभदायक होता है। इससे शरीर का रक्त शुद्ध हो जाता है। व्यायाम करने के लिए तो यह ऋतु बहुत ही उपयोगी है। शीतल और मन्द-सुगन्धित वायु इसी ऋतु में मिलती है जो सबके मन को हर लेती है। अनेक कवियों ने वसन्त को ऋतुराज के रूप में चित्रित किया है। । वास्तव में वसन्त ऋतुराज सब ऋतुओं में महत्त्वपूर्ण है। तितलियों, भौरों और शहद की मक्खियों . को तो इस ऋतु में बहुत ही सुख मिलता है। रंग-बिरंगे फूलों पर भौंरे तथा तितलियाँ मँडराती हुई बड़ी । भली मालूम होती हैं। स्वास्थ्य, प्रसन्नता और प्राकृतिक सुन्दरता की दृष्टि से तो यह बड़ी महत्त्वपूर्ण ऋतु है। मनुष्य जितना प्रसन्न इस ऋतु में रहता है उतना वह किसी अन्य ऋतु में नहीं रहता। |
|