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नीचे दिए गए उद्धरणों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-इसी विशालता के कारण ही भारत को एक उप-महाद्वीप (Indian sub-continent) कहकर पुकारा जाता है। उपमहाद्वीप एक विशाल और स्वतंत्र क्षेत्र होता है। जिसके भू-खंड की सीमाएँ विभिन्न प्राकृतिक भू-आकृतियों (Natural Features) द्वारा बनाई जाती हैं, जो उसे आस-पास के क्षेत्रों से अलग करती हैं। भारत को भी उत्तर दिशा में हिमालय के पार अगील (Aghil), मुझतघ (Muztgh), कुनलुन (Kunlun), कराकोरम, हिन्दुकुश और जसकर पर्वत श्रेणियाँ तिब्बत से, दक्षिणी दिशा में पाक-जल ढमरू मध्य और मन्नार की खाड़ी श्रीलंका से, पूर्वी दिशा में अराकान योमा मियांमार (Burma) से और पश्चिमी दिशा. में विशाल थार मरुस्थल, पाकिस्तान से अलग करते हैं। भारत के इतने विशाल क्षेत्र के कारण ही अनेक सांस्कृतिक, आर्थिक व सामाजिक विभिन्नताएं पाई जाती हैं। परन्तु इसके बावजूद भी देश में जलवायु, संस्कृति आदि में एकता पाई जाती है।(a) भारत को उपमहाद्वीप क्यों कहा जाता है?(b) देश की अनेकता में एकता’ बनाए रखने में कौन-कौन से तत्त्वों का योगदान है ?

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(a) अपने विस्तार और स्थिति के कारण भारत को उप-महाद्वीप का दर्जा दिया जाता है। उप-महाद्वीप एक विशाल तथा स्वतन्त्र भू-भाग होता है जिसकी सीमाएं विभिन्न स्थलाकृतियों द्वारा बनाई जाती हैं। ये स्थलाकृतियां इसे अपने आस-पास के क्षेत्रों से अलग करती हैं। भारत के उत्तर में हिमालय से पार अगील, मुझतघ, कुनलुन, कराकोरम, हिन्दुकुश आदि पर्वत श्रेणियां उसे एशिया के उत्तर-पश्चिमी भागों से अलग करती हैं। दक्षिण में पाक जलडमरू मध्य तथा मन्नार की खाड़ी इसे श्रीलंका से अलग करते हैं। पूर्व में अराकान योमा इसे म्यनमार से अलग करते हैं। थार का मरुस्थल इसे पाकिस्तान के बहुत बड़े भाग से अलग करता है। इतना होने पर भी हम वर्तमान भारत को उपमहाद्वीप नहीं कह सकते। भारतीय उप-महाद्वीप का निर्माण अविभाजित भारत, नेपाल, भूटान तथा बांग्लादेश मिल कर करते हैं।

(b) भारत विभिन्नताओं का देश है। फिर भी हमारे समाज में एक विशिष्ट एकता दिखाई देती है। भारतीय समाज को एकता प्रदान करने वाले मुख्य तत्त्व निम्नलिखित हैं —

  1. मानसूनी ऋतु- मानसून पवनें अधिकांश वर्षा ग्रीष्म ऋतु में करती हैं। इससे देश की कृषि भी प्रभावित होती है और अन्य व्यवसाय भी। मानसूनी पवनें पहाड़ी प्रदेशों में वर्षा करके बिजली की आपूर्ति को विश्वसनीय बनाती हैं। वास्तव में मानसूनी वर्षा पूरे देश की अर्थव्यवस्था का आधार है।
  2. धार्मिक संस्कृति- धार्मिक संस्कृति के पक्ष में दो बातें हैं। एक तो यह कि धार्मिक स्थानों ने देश के लोगों को एक सूत्र में बांधा है। दूसरे, धार्मिक सन्तों ने अपने उपदेशों द्वारा भाईचारे की भावना पैदा की है। तिरूपती, जगन्नाथपुरी, अमरनाथ, अजमेर, हरिमन्दिर साहिब, पटना, हेमकुण्ट साहिब तथा अन्य तीर्थ स्थानों पर देश के सभी भागों से लोग आते हैं और पूजा करते हैं। सन्तों ने भी धार्मिक समन्वय पैदा करने का प्रयास किया है।
  3. भाषा तथा कला- लगभग सारे उत्तरी भारत में वेदों का प्रचार संस्कृत भाषा में हुआ। इसी भाषा के मेल से मध्य युग में उर्दु का जन्म हुआ। अंग्रेज़ी सम्पर्क भाषा है और हिन्दी राष्ट्र भाषा है। इन सब ने मिलकर एक-दूसरे को निकट से समझने का अवसर प्रदान किया है। इसी तरह लोकगीतों तथा लोक-कलाओं ने भी लोगों को समान भावनाएं व्यक्त करने का अवसर जुटाया है।
  4. यातायात तथा संचार के साधन- रेलों तथा सड़कों ने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को समीप लाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूरदर्शन तथा समाचार-पत्रों जैसे संचार के साधनों ने भी लोगों की राष्ट्रीय सोच देकर राष्ट्रीय धारा से जोड़ दिया है।
  5. प्रवास- गांवों के कई लोग शहरों में आकर बसने लगे हैं। उनमें जातीय विभिन्नता होते हुए भी वे एक-दूसरे को समझने लगे हैं और इस प्रकार वे एक-दूसरे के निकट आए हैं।सच तो यह है कि अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक तत्त्वों ने हमारे देश को एकता प्रदान की है।


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